बिजनौर। मौसम बदलने के साथ ही बीमारियां बढ़ने लगी हैं। दूषित पानी और भोजन के सेवन से बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। वहीं, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बारिश के बाद से बुखार भी बच्चों को जकड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना इन समस्याओं के 100 बच्चे तक पहुंच रहे हैं।
बरसात के दिनों में नालियों का गंदा पानी सड़क और घरों में फैल जाता है। ऐसे में गंदगी की वजह से हेपेटाइटिस ए और ई का अधिक खतरा बना है। वहीं, बरसात के मौसम में नमी और जगह-जगह पानी जमा होने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस बहुत तेजी से पनप रहे हैं। इसकी वजह से डायरिया, टाइफाइड, मच्छर जनित रोग मलेरिया, डेंगू होने की संभावना बनी हुई है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में रोजाना 150 से 200 मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें बुखार के 30 प्रतिशत और डायरिया के 40 प्रतिशत मरीज हैं। बुखार के कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिनमें डेंगू, मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसलिए, बरसात में सावधानी बरतने की जरूरत है।
बरसात में इन चीजों का रखें ध्यान
-बच्चों को साफ पानी पिलाएं
-बाहर की चीजें न खाएं
-ताजा खाना खाएं
-घर या घर के आसपास पानी एकत्र नहीं होने दें
-बारिश में भीगने से बचें
-बाहर खुला में रखा भोजन न खाएं
-कटे हुए फलों का सेवन नहीं करें
-गंदे पानी में जाने से बचें
बरसात के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से बच्चे बुखार की चपेट में आ रहे हैं। दूषित खानपान डायरिया की वजह बन रहा है। पिछले एक सप्ताह में बुखार और डायरिया के मरीज बढ़े हैं। इसलिए, बरसात में सावधानी बरतें। ....डॉ. अल्पा राठी, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर