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अभियान के बाद दीखने लगी वान नदी

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अभियान के बाद अब दिखाई देने लगी बान नदी
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बिजनौर। जनपद की बान नदी को जिंदा करने की कवायद रंग लाने लगी है। खेतों में गायब हुई ये नदी अब दिखाई दे रही है। जल बह रहा है। नदी के किनारें पर पेड़-पौधे लहराने लगे हैं।
शासन के निर्देश पर मृत बान नदी को जिंदा करने का आठ जून में महाअभियान शुरू हुआ। प्रशासन के सामने चुनौती थी इसे खोजने की। इसका एरिया नापने की। राजस्व की टीम नक्शे लेकर इस कार्य में लगीं। हालांकि अवरोध बहुत थे। नदी की भूमि पर काबिज किसान जमीन छोड़ने को तैयार नहीं थे। पर प्रशासन की सख्ती के सामने उनकी कुछ नहीं चली।
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लालपुर पंचायत के गांव जीवनपुर में पूजन अर्चना से खेतों में शुरू हुआ अभियान आज रंग ले आया है। मनरेगा से श्रमिक लगाकर कार्य शुरू हुआ। आज नौ मीटर चौड़ी नदी एक मीटर गहरी बनकर तैयार हो गई है। इसमें आज बह रहा है। हालांकि जल कम है, किंतु बरसात में बढ़ने की उम्मीद है।
गांव के प्रधान अशोक कुमार ने कहा कि जमीन खाली कराने के लिए काफी विरोध झेलना पड़ा। नदी के दोनों तटों पर पौधे लगाए गए। नदी और ग्राम पंचायत की जमीन पर भी पौधे लगाए गए हैं। उन्हें पंचायत विभाग से 1700 पौधे लगाने को मिले थे, सब लगवा दिए। अधिकतर जिंदा हैं। ग्राम पंचायत और किसानों की जमीन की बाउंड्री पर लगवाए पौधे कुछ जगह किसानों ने उखाड़कर फेंक दिए। वह कहते हैं कि उनके गांव में इस नदी की लंबाई चार किमी है।
काफी मरे हुए घोंघे दिखाई पड़े
नदी के किनारे घूमते हुए काफी संख्या में मरे घोंघे दिखाई दिए। लगता है कि नदी की सफाई करने मिट्टी के साथ बाहर आ गए और मर गए। शादीपुर निवासी और गन्ना विकास परिषद बिजनौर के सभापति नितिन मौर्य ने कहा कि नदी की चौड़ाई तो नौ मीटर हो गई किंतु सड़क की पुलिया नहीं बनी। पहले दो पाइप डालकर पानी निकलने का रास्ता बनाया गया था। उस समय पानी का बहाव काफी कम था। अब नदी का नौ मीटर चौड़ा फाट है। आने वाली बरसात में नदी का पानी इस पुलिया को तोड़ देगा। बरसात से पहले यहां पर पुल बनना चाहिए। वह कई बार अधिकारियों से कह चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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योजना से गांव के लोगों को मजदूरी
नहर बनाने, मिट्टी निकालने का काम मनरेगा से होना था। ये प्रधानों के लिए बहुत सम्मान वृद्धि का काम था। गांव के लोगों को इससे मजदूरी मिलनी है। इसलिए प्रधानों ने इसमें ज्यादा रुचि ली। अशोक कुमार बताते हैं कि पहले इतना काम नही हो पाता था। उन्होंने गांव के मजदूरों को इस योजना में लाभ दिया। पहली बार लोगों का 90 दिन रोजगार मिला।
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