बिजनौर में प्रशासन आभास महासंघ व अखिल भारतीय गुरु रविदास मानव सुरक्षा दल के पदाधिकारियों को मनाने में कामयाब रहा। दोनों सगठनों ने मंगलवार को बिजनौर के प्रदर्शनी मैदान में होने वाली महांपचायत को स्थगित कर दिया है। इससे प्रशासन को राहत मिली है।
दोनों संगठनों के नेताओं ने मंगलवार को सहारनपुर जिले के गांव शब्बीरपुर में हुई घटना के विरोध में बिजनौर के प्रदर्शनी मैदान में महापंचायत और धरना-प्रदर्शन करने का एलान किया था। इसके लिए एसडीएम उद्धव त्रिपाठी को अनुमति के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। एसडीएम ने अनुमति नहीं दी। इसके बाद भी संगठन के नेता महापंचायत करने पर अड़े थे और जिलेभर में भडकाऊ पंफलेट भी बांट दिए थे। प्रशासन को आशंका थी कि महापंचायत हुई तो सहारनपुर जिले जैसे हालात बिजनौर में न बन जाएं।
प्रशासन ने संगठनों के कई पदाधिकारियों के खिलाफ सोमवार को शहर कोतवाली में रिपेार्ट दर्ज कराई थी। संगठनों के पदाधिकारियों से प्रशासन की वार्ता भी हो रही थी। प्रशासन ने सोमवार की रात चांदपुर निवासी आभास महासंघ प्रदेश महासचिव जगत सिंह को वार्ता के लिए बुलाया, पर कोई नतीजा नहीं निकला। प्रशासन ने बाहरी जिलों से फोर्स बुला ली थी।
मंगलवार को संगठनों के पदाधिकारियों को प्रशासन ने वार्ता के लिए बुलाया। लगभग एक घंटे तक कलक्ट्रेट के सभाकक्ष में वार्ता हुई। इसमें डीएम जगतराज व एसपी अतुल शर्मा ने शांति व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी दंडात्मक कर्रवाई की चेतावनी दी।
वार्ता में अखिल भारतीय गुरु रविदास मानव सुरक्षा दल के दारानगर गंज विदुर कुटी निवासी महात्मा सोहनदास पीडीजी महाराज, आभास महासंघ के जिलाध्यक्ष आदेश कुमार, संगठन के गुप्तचर विभाग के अध्यक्ष आशु कुमार, कपिल कुमार समेत कई नेता शामिल थे। प्रशासन की ओर से डीएम-एसपी के अलावा सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन मदन सिंह गर्ब्याल, एसपी सिटी राजधारी चौरसिया एसपी देहात दिनेश सिंह, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट इंद्रजीत सिंह, सभी एसडीएम, सीओ मौजूद रहे।
डीएम को ज्ञापन देकर गए नेता
बिजनौर। वार्ता के दैारान महांपचायत टालने के बाद आभास महासंघ के नेता अपनी मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को देकर गए। इसमें सहारनपुर जिले के गांव शब्बीरपुर के पीड़ित दलितों को 25 लाख की आर्थिक सहायता देने, घटना में घायल लोगों को इलाज के लिए दो लाख रुपये दिलाने, दलितों की सुरक्षा के उचित कदम उठाने, घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करा कार्रवाई करने, शब्बीरपुर की घटना में दलितों पर दर्ज कराए झूठे मुकदमे वापस लेने की मांग की गई है।