बिजनौर। यूं तो नदियां अपने बहाव का रास्ता खुद तय करती है मगर बाढ़ से बचने के लिए गंगा में सात किलोमीटर लंबा जलमार्ग तैयार होने लगा है ताकि गंगा की धारा नियंत्रण में बहते हुए सीधे बिजनौर बैराज पर पहुंच सके। अमेरिकी ड्रेजिंग मशीन से गंगा में सिल्ट निकालने का काम शुरू हो गया है।
पिछले साल सितंबर में बरसात में गंगा की धारा ने रुख बदल लिया था और धारा सीधे तटबंध से आकर टकराने लगी थी। तटबंध को टूटता देख सिंचाई विभाग के साथ-साथ पूरा प्रशासनिक अमला घबरा गया। उस वक्त महीने भर तक इस तटबंध पर काम चला और आखिरकार तटबंध को टूटने से बचा लिया गया था। एक किलोमीटर की दूरी में तटबंध पूरी तरह से कट गया था, मगर कटान के साथ-साथ चल रहे राहत कार्य के चलते धारा तटबंध की सीमा को लांघ नहीं सकी। इसके बाद सिंचाई विभाग ने 40 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना तैयार की।
सीमेंट और कंक्रीट के जरिए मजबूत होगा तटबंध
बिजनौर बैराज का तटबंध रावली से लेकर बैराज तक 11 किलोमीटर लंबा है। इसमें सिर्फ एक किलोमीटर की दूरी में ही तटबंध कटान की जद में आया था। पहले यह तटबंध कच्चा था, अंदर की तरफ सिर्फ पत्थर ही लगे हुए थे। अब उसी हिस्से को एसीबीएम तकनीक से मजबूत बनाया जाएगा। इसके तहत तटबंध को मजबूती देने का काम चालू हो गया है। इसमें सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल होना है।
धारा भी नहीं बदलेगी रुख, की जा रही ड्रेजिंग
तटबंध की मजबूती के साथ गंगा में ड्रेजिंग करते हुए सिल्ट साफ की जा रही है। ड्रेजिंग मशीन से 60 मीटर चौड़ी और जलस्तर से तीन मीटर गहरी नहरनुमा जलमार्ग तैयार किया जा रहा है। इससे गंगा के पानी को गहराई में बहने की जगह मिलेगी ताकि बाढ़ की स्थिति में गंगा की धारा का फैलाव नहीं होने पाए और तटबंध को भी पानी की टक्कर नहीं लगेगी। आसान भाषा में कहें तो ड्रेजिंग करते हुए पानी के बहाव का रास्ता तैयार किया जा रहा है।
मशीन से ड्रेजिंग करते हुए सिल्ट को हटाते हुए चैनेलाइजेशन काम चालू हो गया है। ड्रेजिंग से पानी के बहाव का रास्ता बना रहे हैं। जून तक इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।
...प्रणव, अधिशासी अभियंता, बैराज यांत्रिक अनुरक्षण खंड, कानपुर