सोमवार को नैना जंगल में अपने पिता महेंद्र सिंह के पास जा रही थी। इस दौरान नदी के निकट गुलदार ने नैना पर हमला कर दिया। नैना ने शोर मचाया तो उधर से गुजर रहे ग्रामीणों ने नैना का बचाने का प्रयास किया। शोर मचाने पर गुलदार नैना को मौके पर छोड़कर गन्ने के खेत में घुस गया। गंभीर रूप से जख्मी नैना को धामपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां नैना की देर शाम मौत हो गई।
मृतका नैना के पिता महेंद्र सिंह और उसके भाई का रोते हुए बुरा हाल है। डीएफओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गुलदार को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
... तो वह अपनी लाडली को झारखंड से न लाता
महेंद्र सिंह दोनों बच्चों को झारखंड से जुलाई में लेकर आया था। बकौल महेंद्र सिंह, वह बच्चों को लेकर अपने साथ इसलिए लाया कि उनकी बगैर मां के वहां पर कौन देखभाल करेगा। बच्चे उसके साथ रहेंगे तो वह ठीक से परवरिश कर सकेगा। बेटी की मौत से महेंद्र सदमे हैं और बार-बार यही कह रहा है कि मैं बेटी को झारखंड से क्यों लेकर आया। पता होता कि ऐसा होगा तो वह झारखंड से अपनी लाडली को लेकर न आता।
दो साल पहले महेंद्र सिंह के पिता का भी स्वर्गवास हो गया। बाकी परिवार के लोग भी अपने बच्चों में व्यस्त हैं। वह बच्चों को अपने साथ यहां न लेकर आता तो शायद नैना की मौत न होती। महेंद्र बेटी की मौत से आहत है। उसका कहना है कि अब वह जब यहां से अपने घर झारखंड वापस जाएगा, तो अपने परिवार के लोगों को नैना के बारे में उन्हें क्या बताएगा। नैना उनकी लाडली थी। वह उनकी काफी देखभाल करती थी। उसकी लाडली उनके आंखों से पलक झपकते ही मौत के गाल में समा गई। मृतक नैना का भाई रोशन भी गहरे सदमे में है। गांव के अरविंद चौहान, सुधीर चौहान एवं उनके परिवार के लोगों को बालिका नैना की मौत हो जाने का दुख है।
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मृतका नैना के पिता महेंद्र सिंह और उसके भाई का रोते हुए बुरा हाल है। डीएफओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि गुलदार को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।