बिजनौर। एनआरएचएम के तहत आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में स्टाफ की नियुक्ति में स्वास्थ्य विभाग ने एनआरएचएम की गाइड लाइन का खुला उल्लंघन किया है। चस्पा फाइनल लिस्ट में विभाग ने सात चिकित्सक गैर जनपदों के नियुक्त किए हैं। जबकि गाइड लाइन स्थानीय चिकित्सकों को प्राथमिकता देने की थी। चहेतों को फाइनल लिस्ट में रखने को विभाग ने फाइनल लिस्ट जारी करने में 12 दिन लगा दिए।
बुधवार को फाइनल लिस्ट देखने पहुंचे स्थानीय आवेदक डॉ. मौहम्मद नवी, डॉ. मौहम्मद मुजीब, डॉ. मौहम्मद खालिद, डॉ. नवेद, डॉ. जाकिर सूची देखकर आक्रोशित हो गए। उन्होंने बताया कि आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना के अंतर्गत हुई एमबीबीएस/दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक समेत अन्य स्टाफ की नियुक्ति में खेल हुआ है। वे इस फाइनल लिस्ट को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उनका आरोप है कि एनआरएचएम के तहत शासन की गाइड लाइन थी कि इस योजना में संविदा स्टाफ की नियुक्ति में स्थानीय अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाए। जबकि बुधवार को जारी फाइनल लिस्ट में 11 एमबीबीएस/दंत चिकित्सकों की सूची में तीन और 11 आयुष चिकित्सकों की सूची में चार चिकित्सक गैर जनपदों के हैं। इस नियुक्ति में साक्षात्कार के मात्र 15 अंक थे। अन्य अंकों में यानि श्रेणी और अनुभव के 85 अंकों में भी हेराफेरी की गई है। आरोप लगाया कि चहेतों को फाइनल लिस्ट तक पहुंचाने में विभाग ने फाइनल लिस्ट जारी करने में 12 दिन लगा दिए।
सीएमओ डॉ. शशि कुमार अग्निहोत्री का कहना है कि शासन से जारी अंकों के आधार पर चिकित्सकों समेत अन्य स्टाफ की नियुक्ति की गई है। अभ्यर्थियों द्वारा मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देश में सभी को अपने बात कहने का अधिकार है।