धामपुर। उत्तर प्रदेश संगीत नाट्य अकादमी लखनऊ की ओर से धामपुर में आयोजित पांच दिवसीय राज्य स्तरीय नाट्य समारोह 2012 के दूसरे दिन उपकार एजुकेशन सोसायटी बरेली के कलाकारों ने जंगीराम की हवेली का मंचन कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंजता रहा।
गुरुवार की रात कन्याइंटर कालेज के सभागार में करीब आधा घंटा विलंब से शुरू हुए समारोह का शुभारंभ दीपेंद्र सिंह चौहान और सरदार सतवंत सिंह सलूजा ने नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप जलाकर किया। लखनऊ नाट्य अकादमी से आए अधिकारी चंद्रमोहन ने नाटक जंगीराम की हवेली के लेखक श्रीगुरु शरण सिंह और निर्देशक अनूप गांधी के बारे में जानकारी दी। कलाकाराें द्वारा प्रस्तुत नाटक में दर्शकों को सीख दी गई कि यह नाटक सत्ता संघर्ष और सामाजिक शोषण पर आधारित है। नाटक में राजनेताओं की गिद्ध दृष्टि को बड़े ही सहज और सरल ढंग से प्रस्तुत किया गया है। बताया गया है कि एक आम आदमी की प्रतिभा गरीबी जीतने की कोशिश में कैसे दम तोड़ देती है? नाटक थियेटर के मानक के अनुरूप न होकर नुक्कड़ शैली पर आधारित रहा। मंचन का प्रकाशीय पक्ष मजबूत होते हुए भी दृष्य अंतराल पर शिथिल देखने को मिला। नाटक का संगीत पक्ष सराहनीय रहा। नाटक में कुमार संजय पागल ने सूत्रधार, राजकुमार वैश्य, अनूप रोबिन, संजीव सक्सेना, शाहिद हुसैन, हरिकृष्ण श्रीवास्तव ने पागलों की भूमिका निभाई। ओमकार गोस्वामी व परवेज खान ने निहाला, राजकुमार वैश्य ने बड़ा मुखिया और अनूप रोबिन, संजीव सक्सेना, हरिकृष्ण श्रीवास्तव ने क्रमश: मुखिया तथा राजू चौहान, परवेज खान और हरिराम वर्मा ने जनता की भूमिका का निर्वहन किया। नाटक के संगीतकार सुधीर मोहन व विनोद एवं कोरस का दायित्व मंच से परे संजय, राजू चौहान, हरिराम वर्मा व परवेज खान ने अनूप गांधी व राजकुमार वैश्य ने रूप सज्जा व वस्त्र सज्जा का दायित्व लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. एनपी सिंह, डा. राजेंद्र चौधरी, सांसद प्रतिनिधि नैनीताल प्रेमप्रकाश सिंह चौहान, कुमार अवनीश, राकेश चौधरी, पंकज कुमार, डीएस चौहान, रामराज, विवेक कुमार व सरदार सतवंत सिंह सलूजा का योगदान रहा।