बिजनौर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर आठ रामचंद्र सिंह ने सिपाही की हत्या कर लूटी गई राइफल रखने के आरोपी रईस को सात वर्ष के कारावास व पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
थाना कोतवाली शहर में तैनात सिपाही महिपाल सिंह साथी सिपाहियों शैलेंद्र, नरेश व अन्य पुलिस कर्मियों के साथ पांच अक्तूबर 2001 को रात्रि गश्त पर था। इस दौरान मोहल्ला बड़वान में फारूख खालिद के घर के पास पांच संदिग्ध व्यक्तियों को खड़े देखा। पुलिस ने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया, तो बदमाशों ने पुलिस पर तमंचे से फायर किया। गोली लगने से सिपाही शैलेंद्र व नरेश घायल हो गए। बदमाश सिपाही शैलेंद्र की राइफल लूटकर ले गए। अस्पताल ले जाते हुए घायल सिपाही शैलेंद्र की मौत हो गई थी। इस मामले में नौ व्यक्तियों के नाम प्रकाश में आए थे। रईस के पास से पुलिस ने लूटी गई राइफल बरामद की थी। पुलिस ने मुजाहिद, हसन, जाहिदा, रईस के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया था। अदालत ने इस मामले में सिर्फ रईस को लूटी गई राइफल रखने के आरोप में धारा 412 में दोषी माना तथा उसे सजा सुनाई। मुजाहिद, जाहिदा, रईस व असलम परवेज को लूट के दौरान सिपाही की हत्या के धारा 396 के आरोप से बरी कर दिया।