मनरेगा से नहीं हो रहे पक्के निर्माण कार्य
अफजलगढ़। अफजलगढ़ विकास खंड की 78 ग्राम पंचायतों में एक वर्ष से मनरेगा योजनांतर्गत होने वाले पक्के निर्माण कार्यों पर ग्रहण लगा है। मनरेगा योजना से पक्के निर्माण कार्य न होने की वजह से ग्राम पंचायत विकास की दौड़ में पिछड़ गई हैं। गांव में रास्तों की हालत बदहाल है। ग्राम प्रधानों ने पक्के निर्माण कार्य कराने की होड़ में वित्तीय वर्ष में जमकर कच्चे कार्य कराए। विभागीय उदासीनता के चलते प्रधानों को सफलता हाथ नहीं लगी।
ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजनांतर्गत होने वाले कच्चे कार्यों में कुल बजट के 40 प्रतिशत धन से पक्के निर्माण कार्य कराए जाने का प्रावधान है। परंतु गत एक साल से विभागीय उदासीनता के चलते ग्राम पंचायतों में पक्के निर्माण कार्यों पर ग्रहण लगा है। किसी भी पंचायतों में एक धेले से भी पक्के निर्माण कार्य नहीं हुए। विभागीय अधिकारियों की मनमानी का यही आलम रहा तो मार्च माह के बाद 78 ग्राम पंचायतों में करोड़ों रुपये की लागत से हुए कच्चे कार्यों का 40 प्रतिशत धन लैप्स हो जाएगा। इस मामले को लेकर प्रधान संघ ने उच्चाधिकारियों से कई बार शिकायत की। प्रधान संघ ने पक्के निर्माण कार्य में ब्लॉक अधिकारियों की पांच प्रतिशत कमीशनखोरी से भी अवगत कराया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानों ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में करीब तीन से दस लाख रुपये तक के कच्चे कार्य करा रखे हैं। प्रधान संघ अध्यक्ष पूरन सिंह, खुर्शीद आलम, हरवंश सिंह आदि का कहना है कि गांव-गांव कीचड़ पसरा है। मनरेगा से कार्य हो जाए तो कहीं हद तक गांव की हालत में सुधार होगा।
मार्च माह में होंगे पक्के निर्माण कार्य
बीडीओ सतीश कुमार पांडेय का कहना है कि अभी उन्होंने चार्ज लिया है। जल्द ही इस संबंध में मीटिंग लेकर मार्च माह में पक्के कार्य कराए जाएंगे। प्रत्येक पंचायत में मनरेगा के 40 प्रतिशत धन का सदुपयोग किया जाएगा। वहीं, गांव मुरलीवाला के मदन राणा का कहना है कि गांव में विकास कार्य ठप पड़े हैं। जहां रास्ते बनाने की जरूरत नहीं है। वहां रास्ते बनाए जा रहे हैं। गांव आलमपुर के रविदत्त शर्मा का कहना है कि गांव में कीचड़ पसरा पड़ा है। कोई रास्ता ऐसा नहीं जिसकी हालत खराब नहीं है। गांव मुरलीवाला के अनिल राठी का कहना है कि मनरेगा योजना से संपर्क मार्ग ठीक कराए जा सकते हैं। गांव रसूलपुर के अफसर अली का कहना है कि प्रधान अपने चहेतों के परिवारों के आसपास ही विकास कार्य करा रहे हैं। जिन रास्तों की हालत बदहाल है, उनकी सुध नहीं ली जा रही है।