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पिछड़े गांवों के जूनियर , प्राइमरी स्कूलों में बच्चों की संख्या अधिक होने के बाद भी शिक्षकों का टोटा

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देहात के स्कूलों में शिक्षक नहीं, नगर में भरमार
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धामपुर। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को देहात के स्कूलों की कोई चिंता नहीं है। जो स्कूल नगर के दो चार किमी की परिधि में संचालित है, उनमें छात्र शिक्षक अनुपात को किनारे कर शिक्षकों की तैनाती कर रखी है। लेकिन सुदूर गांवों में चल रहे स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है।
धामपुर के अल्हैपुर ब्लाक में कुल 142 प्राइमरी और 54 जूनियर हाईस्कूल हैं। करीब 18 हजार से ज्यादा बच्चे इन विद्यालयों में पढ़ते हैं। यदि छात्र-शिक्षक अनुपात के तहत शिक्षकों की तैनाती की बात करें तो अधिकांश स्कूलों में मानकों की अनदेखी की गई है। बीआरसी रिकॉर्ड के अनुसार ब्लाक के 142 में से 53 ऐसे प्राइमरी स्कूल हैं जो एकल शिक्षक भरोसे हैं। जबकि अधिकांश स्कूल शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं। जो स्कूल शिक्षामित्रों के भरोसे चल रहे हैं, उन स्कूलों में शिक्षामित्रों की शिक्षक के रूप में गणना नहीं जा रही है। उन स्कूूूलों को शिक्षक विहीन मान कर जिले में गैर जिलों से आए 341 शिक्षकों को नियुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
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शिक्षकों की तैनाती का कोई मानक नहीं
विभागीय सूत्र बताते हैं कि गांव तीबड़ी के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 117 बच्चों पर दो शिक्षक, रामठेरा में 111 पर दो शिक्षक, बख्शनपुर में 107 पर दो शिक्षक, शाहलीपुर नीचल में 235 पर तीन शिक्षक, मिलक जहांगीराबाद में 205 पर पांच शिक्षक, भनौटी में 165 पर चार शिक्षक, गांव सद्दोबेर में 115 पर तीन शिक्षक तैनात हैं। जबकि नगर के ईदगिर्द गांवों के जूनियर हाईस्कूलों में से गांव जैतरा के स्कूल में 150 पर छह शिक्षक, शेरकोट में 205 पर आठ शिक्षक, रसूलपुर मोहम्मद कुली में 20 बच्चों पर एक शिक्षक, सलावा में 50 बच्चों पर एक शिक्षक तैनात है।

नगर क्षेत्र के स्कूूलों की स्थिति और बदहाल
धामपुर नगर क्षेत्र के जूनियर हाईस्कूलों की स्थिति और भी ज्यादा बदतर है। नगर क्षेत्र में दो जूनियर हाईस्कूल हैं। लेकिन इन दोनों स्कूलों में कोई भी शिक्षक नियुक्त नहीं है। इन दोनों स्कूलों में 25 बच्चों को पढ़ाने को विभाग की ओर से शिक्षामित्रों को नियुक्त कर रखा है। जबकि नगर क्षेत्र के 10 प्राइमरी स्कूलों में छह शिक्षक और आठ शिक्षामित्र ही तैनात हैं।
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अब नहीं रहेगा टोटा: बीएसए महेशचंद
बीएसए महेशचंद का कहना है कि मानक अनुसार 30 छात्रों पर एक शिक्षक की तैनाती होती है। पर जब जिले में शिक्षकों का टोटा था। जिले को अब शिक्षक मिले हैं तो जल्द ही उनकी तैनाती शिक्षक विहीन स्कूलों या फिर एकल शिक्षक वाले स्कूूलों में होगी। जिन विद्यालयों में छात्र कम और शिक्षकों की भरमार है। उन स्कूूलों से मानक विपरीत तैनात शिक्षकों को हटाकर आवश्यकता वाले स्कूलों में भेजा जाएगा।
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