स्कूलों की खंगाली जाएंगी रसोई
बिजनौर। परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन मेन्यू के अनुसार नहीं बना तो कार्रवाई होगी। एमडीएम में गुणवत्ता युक्त भोजन उपलब्ध कराने को शासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। स्कूलों के निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता परखी जाएगी। फिलहाल संकुल प्रभारी स्कूलों में पहुंच कर मिड-डे मील का स्वाद चख रहे हैं।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भोजन की व्यवस्था ग्राम प्रधानों व प्रधानाध्यापकों पर है। बच्चों को गरमागरम भोजन उपलब्ध कराने के लिए समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण कराने के निर्देश हैं। दो जुलाई से अभी तक शिक्षा विभाग के अफसरों को सभी स्कूलों में भोजन उपलब्ध कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी है। करीब 450 स्कूलों में भोजन नहीं बन रहा था। ऐसे स्कूलों के शिक्षकों के वेतन रोकने के फरमान के चलते मिड-डे मील व्यवस्था पटरी पर लौटी। अब शासन ने स्कूलों की रसोईघरों को खंगालने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिले के सभी स्कूलों का निरीक्षण एक दिन में कराने की तैयारी शिक्षा विभाग कर रहा है। निरीक्षण के दौरान जिस स्कूल में बच्चों को भोजन नहीं मिला तो उसके प्रधानाध्यापक व इंचार्ज अध्यापक की खैर नहीं। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण के निर्देश ने शिक्षा विभाग के अफसरों को 25 जुलाई तक जिले के सभी स्कूलों का निरीक्षण कराने को कहा है। इसमें रसोई की साफ-सफाई के साथ भोजन मेन्यू के अनुसार होने को कहा है। भोजन गैस चूल्हे पर बनें, ब्रांडेड मसालों का प्रयोग किया जाए, ऐसा नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूलों की दीवारों पर मिड-डे मील का मेन्यू लिखा होना भी अनिवार्य किया गया है। बीएसए महेश चंद्र के मुताबिक जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने अपने क्षेत्र में मिड-डे मील की व्यवस्था ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं।