बेशकीमती जमीन कब्जाने की फिराक में था लेखपाल
धामपुर। फतेहउल्लापुर खास (अंदर चकबंदी) स्थित बंजर और नवीन परती की बेशकीमती भूमि को कब्जाने की योजना में केवल पटवारी ही शामिल नहीं है, लेखपाल सहित राजस्व विभाग के कई बड़े अधिकारियों ने फर्जीवाड़े के लिए पूरी योजना बनाई थी। इसी योजना के अनुसार सरकारी भूमि के हुए तीनोें बैनामों में करीब 61 लाख के स्टांप और सरकारी फीस जमा करते हुए अलग-अलग कुल 33 लाख रुपये का लेनदेन दिखा कई सौ वर्गमीटर सरकारी भूमि आपस में एक दूसरे के नाम कर दी गई। जबकि नेशनल हाईवे के नजदीक आने के कारण इस भूमि की कीमत वर्तमान में कई करोड़ रुपये है।
उल्लेखनीय है कि फतेहउल्लापुर खास अंदर चकबंदी जिस बेशकीमती भूमि को लेखपाल और तहसील के अधिकारियों ने मिलीभगत कर औने पौने दामों पर दूसरे को बैनामा किया था। असल में उस जमीन को खुर्दबुर्द करने की बाकायदा माफिया ने पूरी योजना तैयार की थी। राजस्व सूत्रों का कहना है कि आरोपियों ने स्थानीय रजिस्ट्री कार्यालय में 19 जनवरी को 151 वर्गमीटर भूमि का बैनामे कराने में 18 लाख 8 हजार रुपये का स्टांप और सरकारी फीस के साथ मात्र इस भूमि के बदले बेचने वाले को मात्र 6 लाख रुपये देना, 14 फरवरी को कराए 252 वर्गमीटर के बैनामे में कुल 18 लाख 15 हजार का स्टांप, सरकारी फीस के साथ कुल 9 लाख रुपये का लेनदेन, 21 फरवरी को कराए 354 वर्गमीटर भूमि के बैनामे में 25 लाख 64 हजार का स्टांप व 18 लाख रुपये जमीन के बदले देना स्वीकार किया है।
इस बेशकीमती भूमि को अलग-अलग गांवों के कई लोगों के नाम बैनामा कराया गया है। आश्चर्यजनक बात यह है जिस बंजर व नवीन परती की भूमि को औने पौने दामों में माफिया ने बेच दिया। उस जमीन की असल कीमत करोड़ रुपये से भी ज्यादा बैठती है। अब एसडीएम के सरकारी भूमि को उसकी मूल श्रेणी में वापस करने के आदेश के बाद भूमि खरीदने के नाम पर खर्च किए 61 लाख के स्टांप और सभी बैनामे शून्य हो जाते हैं। एसडीएम की कार्रवाई से आरोपियों में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले से जुडे़ लोग अपने बचाव में अधिकारियों की परिक्रमा करते पजर आ रहे हैं। वहीं, एसडीएम कुंवर वीरेंद्र मौर्य के आदेश के बाद आरोपी सुभाष, हिंमाचल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए लेखपाल डेविड ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दे दी है। लेखपाल तेजपाल सिंह का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। विवादित भूमि को उसकी मूल श्रेणी में वापस भेज दिया है। उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है। वहीं, कोतवाल सुधीर पाल धामा ने बताया कि पटवारी डेविड की ओर से दो आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट कायम करने को तहरीर दी गई थी। लेकिन तहरीर में कुछ कमी पाए जाने पर अभी रिपोर्ट कायम नहीं हो सकी है।