शब ए बारात इबादत की रात : इफ्तिखार
शेरकोट। मदरसा इस्लामिया अरबिया रहमानिया के सालाना जलसे का आयोजन हुआ। जिसमें हजरत मौलाना इफ्तिखार ने कहा कि शब ए बरात की रात में सब इंसानों के आमाल अल्लाह के सामने पेश किया जाता है। इस रात में बंदा जो खुदा से सच्चे दिल से मांगता है, वह मिलता है। जो तौबा करता है, वह कबूल होती है।
जलसे का आगाज हाफिज हसीबुर्रहमान की तिलावते कलाम पाक, हाफिज शहाबाज साहब की नात ए पाक से हुआ। हजरत मौलाना ने कहा कि शब-ए-बारात कोई त्योहार मनाने का दिन नहीं, बल्कि यह रात इबादत की रात है। इस रात में पूरी इंसानियत का फैसला होता है। इस साल में कौन मरेगा कौन जिएगा, किसको इज्जत मिलेगी, किस को जिल्लत मिलेगी, शब ए बरात की रात में सब इंसानों को आमाल अल्लाह के सामने पेश किया जाता है। मौलाना ने कहा अल्लाह के नबी की जिंदगी को अपना आइडियल बनाओ, अल्लाह के नबी की सुन्नत पर अमल करो। मौलाना उबैदुर रहमान ने कहा आग से आग को नहीं बुझाया जा सकता। बुराई का बदला भलाई से दो। माफ़ करने वाले बनो, पड़ोसी का हक अदा करो। चाहे पड़ोस में हिंदू का ही घर हो, वह आपका पड़ोसी है, उसका आप पर हक है।
मुफ्ती फसाहत हुसैन शाही मुरादाबाद, मौलाना अकीलुद्दीन बिजनौर, कारी इलियास ने भी जलसे को खिताब किया। कारी नजीब रहमान, फरीद अहमद, वलीद उर रहमान ने नाते पाक का नजराना पेश किया। कुरान हिफ्ज मुकम्मल करने वाले फिदाउर्रहमान, शहाबुद्दीन, मोहम्मद जावेद सहित कई की दस्तारबंदी हुई। मौलाना इफ्तिखार ने अमनो अमान की दुआ कराई। मौलाना अताउर्रहमान, पूर्व चेयरमैन शेख कमरुल इस्लाम, इफ्तेखार महमूद, मुतिउर्रहमान, दिलशाद अहमद, नदीम मंसूरी रहे। सदारत हजरत मौलाना इफ्तिखार साहब, निजामत हजरत मौलाना उबैदुर रहमान ने की।