बिजनौर। गन्ना विभाग किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करेगा। इसकी शुरुआती लागत केवल सवा 11 रुपये प्रति बीघा होगी। इस प्रयोग से पहले ही साल में यूरिया आदि रासायनिक खाद का प्रयोग 25 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। जैविक खेती के लिए जैविक उर्वरक गन्ना सोसाइटी में भिजवा दिए गए हैं। जैविक उर्वरक से फसल का उत्पादन अधिक होगा और लागत कम होगी। इससे किसानों को दोहरा फायदा होगा।
गन्ने के उत्पादन ने किसानों की आय बीते दस साल में पांच गुना बढ़ा दी है, लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल आय ही बढ़ी हो। किसानों ने गन्ने के उत्पादन में लागत भी कई गुना बढ़ा दी है। किसान अधिक उत्पादन के लिए लागत की परवाह नहीं कर रहे और खेतों में अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे स्थिति खतरनाक होती जा रही है। जिले में हर साल करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया खेतों में डाला जाता है। इसकी कीमत अरबों रुपये में है। खेतों में इतना यूरिया डालने के बाद भी जमीन में नाइट्रोजन बहुत कम है। जबकि वायुमंडल में नाइट्रोजन 78 प्रतिशत तक होता है। किसान खेतों में जो यूरिया डालते हैं उसका अधिकांश हिस्सा हवा में उड़ जाता है। गन्ना विभाग द्वारा जो जैविक उर्वरक किसानों को देगा उसमें एजोस्पाइरिल, एजोटोबेकस आदि बैक्टिरिया होंगे। यह बैक्टिरिया जमीन के अलावा हवा में मौजूद नाइट्रोजन को फसल में पहुंचाएंगेे। जैविक उर्वरक की एक लीटर बोतल की कीमत 70 रुपये हैं। दो लीटर उर्वरक एक हेक्टेअर जमीन में स्प्रे करने के लिए पर्याप्त है। इसके स्प्रे से पहले ही साल में नाइट्रोजन, फास्फोरस की लागत कम की जा सकती है।
करोड़ों रुपये की होगी बचत
किसान खेतों में अंधाधुंध उर्वरक डालता है। वर्तमान में यूरिया की 45 किलो की बोरी 295 रुपये की है। किसान एक बीघा गन्ने में 30 किलो तक खाद डालते हैं। जैविक खाद डालने पर यूरिया साढ़े सात किलो कम डालना होगा। इतने खाद की कीमत करीब 49 रुपये होगी। जिले में करीब सवा दो लाख हेक्टेअर यानि 28 लाख 12 हजार 500 बीघा जमीन में गन्ने की खेती होती है। इतनी जमीन में जैविक खाद का प्रयोग कर 25 प्रतिशत यूरिया कम किया जाए तो इतने यूरिया की कीमत 13 करोड़ 78 लाख है।
खेत की खुराक है खाद
केवल रासायनिक उर्वरकों के आधार पर होने वाली खेती में स्थायित्व नहीं होता है। रासायनिक उर्वरकों से जमीन बंजर होने लगती है। किसान के स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है। जैसे फसल को पानी चाहिए वैसे ही खेत को गोबर व हरी खाद, पत्ती की खाद की जरूरत होती है। किसान खेत को इनका खाद जरूर दें।
जैविक खाद प्रयोग करें किसान : डीसीओ
जिला गन्ना अधिकारी ओपी सिंह के अनुसार किसान खेतों में अधिक से अधिक जैविक खाद का प्रयोग करें। यह हर प्रकार से खेत व फसलों के लिए लाभदायक है।
ब्लॉक खेतों में नाइट्रोजन
मोहम्मदपुर देवमल अति न्यून
हल्दौर अति न्यून
जलीलपुर अति न्यून
नूरपुर अति न्यून
धामपुर अति न्यून
स्योहारा न्यून
नहटौर न्यून
नजीबाबाद अति न्यून
किरतपुर अति न्यून
कोतवाली अति न्यून
अफजलगढ़ अति न्यून
नोट : उक्त आंकड़े कृषि विभाग से लिए गए हैं।