गंगा में छोड़े गए 60 घड़ियाल
बिजनौर। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व वन विभाग की टीम ने गंगा में 60 घड़ियाल छोड़े हैं।
जलीय जीव ही नदी का जीवन होते हैं। गंगा में जलीय जीवों को बढ़ाने के अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। मेरी गंगा मेरी सूंस अभियान के तहत हर साल गंगा में डॉल्फिन की गिनती होती है। बुधवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व वन विभाग की टीम ने गंगा में 60 घड़ियाल छोड़े हैं। ये अभी बच्चे हैं। इनमें 50 मादा व दस नर घड़ियाल हैं। इन घड़ियालों को लखनऊ के ब्रीडिंग सेंटर से लाकर गंगा में बिजनौर व मुजफ्फरनगर के बीच में छोड़ा गया है। इनकी लंबाई 120 से 137 सेंटीमीटर तथा वजन 5.4 किलोग्राम से 6.2 किलोग्राम तक है। पहले भी गंगा में घड़ियाल छोड़े गए था। गंगा में डॉल्फिन की संख्या भी बढ़ रही है। पिछले साल हुई गणना में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को गंगा में 33 डॉल्फिन दिखीं थी। घड़ियालों को छोड़ते समय डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना निदेशक संजीव यादव, मोहम्मद शाहनवाज खान, डीएफओ बिजनौर डा.एम सेम्मारन आदि मौजूद रहे। संजीव यादव के अनुसार घड़ियाल मछली आदि खाते हैं। वे मनुष्यों पर हमला नहीं करते हैं। यह आमतौर पर गांवों में तालाब में भी नहीं जाते हैं।
जलीय जीवों के लिए आदर्श स्थिति
गंगा का पानी इस समय पहले से बहुत साफ हुआ है। राष्ट्रीय हरित अभिकरण तथा केंद्र सरकार के प्रयास व कुंभ के आयोजन को देखते हुए प्रदूषित पानी को गंगा में जाने से रोक दिया गया था। आदर्श परिस्थितियों को देखते हुए गंगा में घड़ियाल छोड़े गए हैं।