बिजनौर। सीसीटीवी कैमरे नहीं लगवाने वाले जिले के माध्यमिक विद्यालयों को उसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है। शासन ने स्कूलों की निर्धारित अंकों के आधार पर ग्रेडिंग प्रक्रिया शुरू की है। शासन ने सीसीटीवी कैमरा लगवाना अनिवार्य किया है। कैमरा नहीं लगवाने पर शून्य अंक मिलेगा। इसका सीधा असर विद्यालय के बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण पर पड़ेगा।
डीआईओएस राजेश कुमार के अनुसार शासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा लगवाने के आदेश दिए है। स्कूलों की वरीयता तय करने के लिए ग्रेडिंग प्रक्रिया की गई। इसमें सीसीटीवी कैमरे के दस अंक निर्धारित हैं। जिले में 357 राजकीय, शासन से सहायता प्राप्त व वित्त विहीन विद्यालय हैं। विद्यालयों को सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाने के शासनादेश है। ग्रेडिंग का पूरा विवरण कॉलेज को विभाग की वेबसाइट पर डालना जरूरी किया गया था। जिले के आधे से अधिक विद्यालयों ने सीसीटीवी कैमरे लगवाने समेत अन्य विवरण अपलोड नहीं किया है। अब शासन ने वेबसाइट लॉक कर दी है। इसका खामियाजा स्कूलों को उठाना पड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार शासन ने प्रयोगात्मक परीक्षा में पैसे का खेल होने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रैक्टिल प्रयोगशाला में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कराने का निर्णय लिया है। प्रयोगात्मक परीक्षा की वीडियोग्राफी भी होगी। कैमरे नहीं लगवाने वाले स्कूलों का प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्र बदल सकता है।
डीआईओएस के अनुसार बोर्ड की लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण बोर्ड कार्यालय से होना है। वहां से सूची मिलने के बाद विभाग उनका भौतिक सत्यापन करेगा। विभाग यह पता लगाएगा कि विद्यालयों ने गलत सूचना देकर केंद्र निर्धारण तो नहीं करा लिया है। केंद्र निर्धारण की नई नीति से विद्यालयों के प्रधानाचार्यों में खलबली है।