बिजनौर। रोशनी और खुशियों के त्योहार दीपावली पर देखभाल कर आतिशबाजी करें। पटाखों के तेज धमाके श्रवण शक्ति छीन सकते हैं।
जिससे त्योहार की खुशियां काफूर हो सकती हैं। दीपावली पर तेज धमाके वाले पटाखों की धूम रहती है। इस मौके पर एक दूसरे से तेज धमाके करने की होड़ लगी रहती है।
पटाखों से निकली 35 डेसीबल तीव्रता की ध्वनि कानों के लिए कष्टदायक होती है। अचानक निकली 70 डेसीबल की ध्वनि भयानक पीड़ा के साथ कान के परदे को खराब कर सकती है। सभी को चाहिए कि कम से कम पटाखें जलाएं। आतिशबाजी रहित दीपावली मनाएं।
बच्चों ने जमकर की पटाखों की खरीदारी
दीपावली पर प्रदर्शनी मैदान में आतिशबाजी की बिक्री की जा रही है। सुबह से ही बच्चे अपने अभिभावकों के साथ आतिशबाजी खरीदने के लिए प्रदर्शनी मैदान में आना शुरू हो गए। बच्चों ने दीपावली पर धमाल मचाने के लिए पटाखों की खूब खरीदारी की। चरखी, अनारी, रॉकेट, फुलझड़ी, महताबी आदि की खूब बिक्री हुई। मंगलवार को सभी ने अपने घर पर झालरें भी सजा लीं। वहीं बाजार में छोटी दीपावली पर भी ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही। ग्राहक बाजार में गिफ्ट आइटम लेने के लिए उमड़े रहे। पोस्टर, मोमबत्ती आदि सजावट के सामान भी खूब बिके। कैंडल की भी जमकर खरीदारी हुई। भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की मूर्तियों की स्पेशल डिमांड रही। बाजार दूसरे दिन भी सजावट से गुलजार रहा।
यह बरतें सावधानी
दीपावली पर कम तीव्रता वाले यानी छोटे पटाखे ही फोड़ने चाहिए। पटाखे फोड़ने के समय कानों में रूई लगा लें। आतिशबाजी को दूर से देखें।
नहीं मापी जाती ध्वनि की तीव्रता
स्वास्थ्य विभाग के पास ध्वनि की तीव्रता मापने का यंत्र नहीं है। दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान कभी भी ध्वनि की तीव्रता नहीं मापी जाती।
न ही पटाखों पर उनकी तीव्रता अंकित होती है। ईएनटी सर्जन डॉ. सुभाष राना का कहना है कि 70 डेसीबल से अधिक तीव्रता के धमाके के बाद कान में स्थायी बहरापन आ सकता है, जो ऑपरेशन के बाद भी ठीक नहीं हो सकता है।
आपातकालीन स्टाफ की उपस्थिति के निर्देश
दीपावली पर आतिशबाजी के दौरान झुलसने वाले लोगों के उपचार के लिए डीएम ने आपातकालीन स्टाफ के उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
कहा कि दीपावली के मौके पर 11 और 12 नवंबर को जिला अस्पताल व सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय स्टाफ मौजूद रहे।