किसानों की प्रशासन से वार्ता विफल
हल्दौर। थाने प्रशासनिक अधिकारियों, आकियू नेताओं और क्षेत्रीय किसानों के बीच चकबंदी कराने को लेकर घंटों चली वार्ता बेनतीजा रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को चकबंदी निष्पक्ष और ईमानदारी से कराने का भरोसा दिलाया। लेकिन किसान चकबंदी न कराने की जिद पर अड़े रहे।
करीब तीन वर्ष पूर्व हल्दौर और आसपास के गांवों में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी। चकबंदी विभाग की टीम ने कुछ क्षेत्र की चकबंदी कर दी। जबकि कुछ क्षेत्र की बाकी रह गई। चकबंदी प्रक्रिया के दौरान कुछ किसानों के चक एक जगह से अलग-अलग जगहों पर विस्थापित कर दिए गए। कुछ किसानों ने चकबंदी विभाग के अधिकारियों पर मोटी रिश्वत लेकर उनके चकों को मनमाने ढंग से विस्थापित करने का आरोप लगाया। जिसके बाद चकबंदी प्रक्रिया रुकवा दी गई। इस मामले का पटाक्षेप को लेकर बुधवार दोपहर हल्दौर थाने में एसडीएम सदर ब्रजेश कुमार, पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर महेश कुमार, चकबंदी बंदोबस्त अधिक मेघ वरन सिंह, थाना प्रभारी निरीक्षक सतेंद्र भड़ाना, कानूनगो गोवर्धन सिंह और हल्का लेखपाल विकास कुमार आदि और क्षेत्र के किसानों की बैठक शुरू हुई।
प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को सुना और चकबंदी निष्पक्ष, ईमानदारी और मानक अनुरूप कराने का भरोसा दिलाया। लेकिन किसान उनके आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। थाने में मौजूद आजाद किसान यूनियन के जिला उपाध्यक्ष बिट्टू चौधरी, महाशय घनश्याम सिंह, राजकुमार, ठाकुर नरेंद्र सिंह, बिजेंद्र सिंह, घसीटा सिंह, डॉक्टर अशोक कुमार, सतीश कुमार, धर्मपाल सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान चंद्रवीर सिंह, मनोज कुमार रवेंद्र सिंह, पवन कुमार, हुकुम सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि का कहना था कि सर्व प्रथम उनके बिखरे हुए चकों को एक जगह कराया जाए। उसके बाद चकबंदी प्रक्रिया शुरू कराई जाए। दोनों पक्षों के बीच चकबंदी कराने को लेकर करीब तीन घंटे वार्ता चली। न तो प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों की मांगों को स्वीकारा और न ही किसान चकबंदी कराने को राजी हुए। एसडीएम सदर ब्रजेश कुमार ने बताया कि उच्च अधिकारियों को मामले से अवगत करा दिया गया है।