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दो लाख का क्लेम ब्याज सहित देने के निर्देश

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बिजनौर। जिला उपभोक्ता फोरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा नजीबाबाद व डिविजनल ऑफिस भारतीय जीवन बीमा निगम लिमिटेड जीवन प्रकाश प्रभात नगर मेरठ को स्व. निहाल सिंह की पत्नी जयदेई को क्लेम की दो लाख रुपये की राशि छह प्रतिशत साधारण ब्याज दर के साथ 30 दिन के अंदर देने के आदेश दिए हैं। मानसिक क्षति तीन हजार और वाद व्यय दो हजार भी बीमा कंपनी को देने होंगे।
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नजीबाबाद के गांव गुनियापुर निवासी जयदेई पत्नी स्व. निहाल सिंह ने फोरम में दाखिल परिवाद में बताया था कि उसके पति निहाल सिंह ने 11 दिसंबर 2012 को भारतीय जीवन बीमा निगम से एक पॉलिसी कराई थी। निहाल सिंह पढ़े लिखे नहीं थे और केवल अपने हस्ताक्षर करना जानते थे। आयु प्रमाण पत्र के लिए उन्होंने राशन कार्ड की फोटो कॉपी लगाई थी, जिसमें उनकी आयु 50 वर्ष उल्लिखित थी। पॉलिसी में छमाही किश्त देय थी और यह 12 दिसंबर 2028 को पूरी होनी थी, निहाल सिंह ने पॉलिसी की दो किश्त जमा कीं। बीमा कंपनी ने निहाल सिंह को किश्त अदायगी की जो रसीदें जारी कीं, उनमें आयु 49 वर्ष दिखाई गई।
निहाल सिंह ने पत्नी जयदेई को नॉमिनी बनाया था, निहाल सिंह की मृत्यु के बाद जयदेई ने क्लेम प्राप्ति के लिए आवेदन किया। भारतीय जीवन बीमा निगम ने यह कहते हुए क्लेम अमान्य कर दिया कि पॉलिसी में आवेदन में गलत तरीके से आयु 49 वर्ष दर्शाई गई, जबकि निहाल सिंह की आयु 50 वर्ष थी। निगम ने फोरम में दाखिल अपने जवाब में कहा कि निहाल सिंह द्वारा गलत आयु दर्शाई गई। यह पॉलिसी 50 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए नहीं थी। फोरम की जांच में सामने आया कि पॉलिसी किसी को देते समय अभिकर्ता द्वारा नियम व शर्तें पढ़कर नहीं सुनाई जाती हैं तथा प्रलोभन दिए जाते हैं।
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आवेदक का आयु प्रमाण पत्र उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया जाता है तथा बीमा व्यवसाय के आंकड़ों को अधिक दर्शाने में अधिकारियों द्वारा अमान्य प्रपत्रों की अनदेखी कर दी जाती है। बीमाधारक की मृत्यु के बाद निगम उस पत्र को फर्जी बताने लगता है, जिनके आधार पर पहले पॉलिसी जारी की गई थी। जांच में पता चला कि निहाल सिंह की पॉलिसी की समस्त प्रविष्टी अभिकर्ता द्वारा ही भरी गई थीं। उसमें निहाल सिंह की आयु 49 साल अंकित की गई है। पॉलिसी के पृष्ठ दो, तीन पर निहाल सिंह के हस्ताक्षर भी अंकित नहीं मिले। फोरम अध्यक्ष और एचजेएस सुधीर कुमार, महिला सदस्य बबीता देवी ने अपने निर्णय में कहा कि निगम द्वारा पॉलिसी का क्लेम देने से इंकार करना न्यायसंगत नहीं है। क्लेम के लिए जयदेई का वाद आंशिक रूप से स्वीकार किए जाने योग्य है। उन्होंने भारतीय जीवन बीमा निगम को जयदेई को क्लेम देने के निर्देश दिए हैं।
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