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टीबी के बढ़ते मरीजों को रोकने के लिए मेडिकल स्टोर रखेंगे उनकी जानकारी

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चिकित्सक के पर्चे के बगैर नहीं देंगे दवाइयां
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बिजनौर। टीबी के एमडीआर (मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट) व एक्सडीआर (एक्सट्रिमली ड्रग रेसिस्टेंट) के बढ़ते मरीजों को रोकने के लिए मेडिकल स्टोर संचालक मरीज को बिना चिकित्सक के पर्चे के टीबी की दवाई नही देंगे। संचालक को दवाई के क्रय विक्रय के साथ-साथ मरीज व चिकित्सक की जानकारी भी रखनी होगी। मरीजों के प्रत्येक माह की रिपोर्ट सीएमओ, डीटीओ व औषधि कार्यालय को भी भेजनी होगी। ऐसा नहीं करने पर मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
जिले में प्रत्येक वर्ष टीबी के सामान्य 500 से अधिक व एमडीआर के 50 से अधिक मरीज बढ़ते हैं। जिले में कुल सामान्य तीन हजार, एमडीआर 150 व एक्सडीआर के पांच मरीज है। प्रत्येक साल टीबी के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। औषधि अनुज्ञापन एवं नियंत्रण प्राधिकारी उप्र एके जैन ने खाद्य सुरक्षा एवं औषधि अधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियमावाली 1945 के नियम 65 के अनुसार श्ेाड्यूल एच-1 के अंर्तगत मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी की दवाईयों के क्रय विक्रय का हिसाब रखना होगा। डीआई आशुतोष मिश्रा ने बताया कि प्रत्येक माह मेडिकल स्टोर संचालकों को क्रेता का नाम, मोबाइल नंबर, मेडिकल स्टोर का पता व विक्रेता का नाम, मोबाइल नंबर, पता, बिल नंबर व किस चिकित्सक के पर्चे पर दवाई ली गई है यह जानकारी की रिपोर्ट बनाकर सीएमओ, डीटीओ व औषधि कार्यालय का भेजनी होगी।
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कैसे बढ़ रही है मरीजों की संख्या
जिला क्षय अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि प्राइवेट चिकित्सकों के यहां से दवाई लेने वाला सामान्य टीबी का मरीज छह से आठ माह के कोर्स को बिना पूरा किए दवाई छोड़ देता है तो वह एमडीआर में बदल जाता है। हालांकि प्राइवेट अस्पताल वाले दवाई छोड़ने के बाद टीबी के मरीजों पर ध्यान नहीं देते और उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को भी नही देते है। ऐसे में एमडीआर और एक्सडीआर के मरीज बढ़ जाते हैं। मेडिकल स्टोर से मरीज की जानकारी आने पर उसको ट्रेस किया जाएगा।
कितने माह के होते हैं कोर्स
डीटीओ ने बताया कि टीबी के सामान्य मरीज को उपचार छह से आठ माह तक किया जाता है। एमडीआर और एक्सडीआर का 24 से 27 माह का होता है।
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