प्रदूषित पानी को साफ कर प्रयोग में लाया जाएगा
बिजनौर। बिजनौर नगर पालिका क्षेत्र में घरों से निकला गंदा पानी अब ऐसे ही बहकर भूगर्भ जल को प्रदूषित नहीं करेगा। इस पानी को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट कर फिर से शुद्ध किया जाएगा। शहर क्षेत्र में मकान बनाने, सिंचाई आदि में यह पानी प्रयोग किया जाएगा। बाकी बचे पानी को गंगा में छोड़ा जाएगा।
नगर पालिका और आसपास के क्षेत्रों में 24 नलकूपों से पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा नगर पालिका द्वारा सैकड़ों हैंडपंप भी लगाए गए हैं। नागरिकों के घर पर व्यक्तिगत हैंडपंप भी लगे हैं और सबमर्सिबल भी हैं। मुख्यत: पेयजल का पानी घरों में शौचालय, रसोई और बाथरूम में प्रयोग होता है। जितना पानी प्रयोग होना चाहिए, उससे काफी ज्यादा पानी लापरवाही में ही बर्बाद किया जाता है। नगर पालिका घरों से निकलने वाले पानी का कनेक्शन सीवर लाइन से जोड़ेगा। इस पानी को घरों के निर्माण, सिंचाई, अन्य प्रयोग में लाया जाएगा। इस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। नगर पालिका के ईओ इंद्रपाल सिंह का कहना है कि पानी को साफ कर दूसरे प्रयोग में लाने की कवायद की जा रही है। नागरिक भी पानी को बेकार न बहाएं और जल बचाने की आदत डालें।
ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाई जाएगी सीवर लाइन
एक अनुमान के मुताबिक 24 घंटे में नगर पालिका क्षेत्र से 14 मिलियन लीटर डेली यानि करीब एक करोड़ 40 लाख लीटर पानी नाली में बहता है। जल निगम द्वारा जो सीवर लाइन शहर में डाली गई है उसमें 24 एमएलडी यानि करीब दो करोड़ 40 लाख लीटर पानी बह सकता है। ऐसे में शहर के पानी को सीवर के ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। अब तक मकान के निर्माण आदि में शुद्ध पेयजल का ही प्रयोग किया जाता है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से शुद्ध हुआ पानी इस प्रयोग में आने से पेयजल की बहुत बचत होगी।
ट्रीट पानी से बनी है एक किलोमीटर लंबी झील
बंगलूरू में ऐसे ही ट्रीट किए गए पानी से करीब एक किलोमीटर लंबी झील बनाई गई है। वह झील मनोरंजन और पर्यटन का भी मुख्य केंद्र बनती जा रही है। वहां के रहने वाले लोग अपने परिवार के साथ झील में नौका विहार तक करते हैं। इसके अलावा इस पानी का भवन निर्माण, सिंचाई, मछली पालन आदि में भी प्रयोग किया जा सकता है।