मंडावली/नजीबाबाद। घोड़ों और खच्चरों में ग्लंडरफार्सी बीमारी की जांच के लिए पशु चिकित्सकों ने पशुओं के खून के नमूने लिए। पशुपालकों के विरोध के चलते पशु चिकित्सकों को पुलिस बुलानी पड़ी। जुलाई में एक खच्चर में ग्लंडरफार्सी बीमारी पाए जाने पर उसे मारा गया था।
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव राहतपुर खुर्द में कई परिवार पर्वतीय क्षेत्रों में घोड़ों-खच्चरों के जरिए आजीविका कमाते हैं। वर्षाकाल में पहाड़ों पर भारी बारिश के चलते यह परिवार घोड़ों-खच्चरों को वापस गांव ले आए हैं। बुधवार दोपहर उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.जगवीर सिंह के नेतृत्व में पशु चिकित्सकों की टीम गांव राहतपुरखुर्द पहुंची। घोड़ों-खच्चरों के ग्लंडरफार्सी बीमारी से ग्रसित होने की आशंका व्यक्त करते हुए चिकित्सकों की टीम ने पशुओं के खून का नमूना जांच के लिए लेने की कोशिश की, तो पशुपालकों ने टीम का विरोध शुरू कर दिया। पशुपालक दिलशाद, अजीज, सुल्तान, अजीम का आरोप था कि बीमारी की बात कहकर डॉक्टर उनके पशुओं को मार रहे हैं। जुलाई माह में भी एक खच्चर में ग्लंडरफार्सी बीमारी होने की बात कहकर उसे मार दिया गया था। पशुपालकों के विरोध पर उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.जगवीर सिंह ने इसकी सूचना एसडीएम उद्भव त्रिपाठी को दी। एसडीएम ने मंडावली पुलिस को गांव राहतपुर पहुंचने के निर्देश दिए। पुलिस पहुंचने पर पशुपालक घोड़ों व खच्चरों के खून के नमूने देने पर राजी हुए।
डॉ.जगवीर सिंह ने बताया कि 17 पशुओं के खून के नमूने लिए गए हैं। यह जांच के लिए केंद्रीय प्रयोगशाला हिसार भेजे जाएंगे। ग्लंडरफार्सी पॉजीटिव रिपोर्ट आने पर पशु को मारना मजबूरी होगी। चिकित्सक ने बताया कि ग्लंडरफार्सी बीमारी लाइलाज है। यह रोग घोड़ों-खच्चरों से मनुष्य में फैलने की आशंका बनी रहती है। अभियान में पशुधन प्रसार अधिकारी बलवंत सिंह, अमित कुमार, फार्मासिस्ट दलपत सिंह, पवन कुमार शामिल रहे।