रेहड़ (बिजनौर)। सोनी और मोनी करीब छह घंटे बाद परिजनों को स्कार्पियों से मिली, वह भी मृत हालत में। दोनों ने जिंदगी के लिए काफी जद्दोजहद की। स्कार्पियो के शीशे पर उनकी हथेलियों के असंख्य निशान इस संघर्ष को बयां कर रहे है।
फोरेंसिक टीम के सदस्य डा. महेंद्र ने बताया कि स्कार्पियो के लॉक अंदर से बंद थे। संभवत: दोनों बच्चियों के अंदर जाने के बाद कार में सेंट्रल लॉक लग गया होगा। तेज धूप और उमस से कार में ऑक्सीजन की कमी होने लगी तो दोनों को दम घुटने लगा। दोनों ने जान जाने से पहले कार के दरवाजे और शीशे खोलने के लिए खूब हाथ पांव मारे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में दम घुटने से दोनोें की मौत हो गई। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक राजकुमार का कहना है कि बंद कार में लंबे समय तक बंद रहने से आक्सीजन नहीं मिल पाती र्है। इस कारण दम घुटने से मौत होती है। दूसरी तरफ, सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी डा. बीके सिंह ने बताया कि जिस प्रकार के हालत बच्चों के साथ गुजरे है। उस हालात में दोनों बच्चों की मौत हीट स्ट्रोक के कारण हुई है। सोमवार को मौसम का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के करीब था। तेज गरमी थी। गाड़ी के शीशे बंद थे। ऐसा होने से गाड़ी का तापमान और अधिक हो गया। जिससे बच्चों को हीट स्टॉक हो गया। पीने को पानी नहीं मिला। जिसकी वजह से बच्चों की मौत हो सकती है।
पीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पीके गुप्ता का कहना है कि स्कार्पियो में बच्चियों की मौत का कारण डीहाइड्रेशन हो सकता है। जब बच्चों ने बंद गाड़ी में बाहर निकलने को हाथ पैर मारे होंगे। उनका शरीर से पसीना बहा होगा। बच्चों को पीने का पानी गाड़ी में मिला नहीं । ऐसे में बच्चों का ब्लड प्रेशर डाउन होने से उनकी मौत हो सकती है।
मां बेसुध तो पिता हो गए गुमसुम
रेहड़। कुंवरपाल सिंह की तीन बेटियों में से दो पुत्रियों की मौत हो गई जबकि तीसरी पुत्री एक साल की रेेेशु है। हादसे के बाद मां रजिया बेसुध है। होश आता है और फिर बेहोश हो जाती है। दो बेटियों की अचानक हुई मौत से पिता कुंवरपाल सिंह गुमसुम है। गांव के लोग भी शोक में डूबे है। हर कोई दंपति को दिलासा देने की कोशिश कर रहा है।
क्या करें ऐसे हालात में
बिजनौर। कार मिस्त्री जुल्फिकार के मुताबिक कार का सेंटर लॉक होने के बाद कार को अंदर से मैन्युअल तरीके से खोला जा सकता है। बस जरूरत है थोड़ा सा सतर्क रहने की। हालांकि बच्चे अबोध होने के कारण लॉक नहीं खोल पाते हैं और ऐसी हालत में लंबे समय तक कार में बंद करने के कारण दम घुटने ने उनकी मौत होने की ज्यादा संभावना रहती है। तो परिजनों को उनका ध्यान रखना चाहिए।