हिंदू संगठनों के सहयोग से हुआ एक नेपाली का अंतिम संस्कार
बिजनौर। बुधवार रात नेपाल से शिमला जाते वक्त बैराज मार्ग पर बस पेड़ से टकराने पर मरे तीन नेपालियों में से एक के शव का शनिवार को बैराज घाट पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं के सहयोग से अंतिम संस्कार किया गया। दो मृतकों के परिजन शव लेने नहीं अब तक नहीं आए हैं। दो देशों के बीच का मामला होने के कारण पुलिस आला अफसरों से राय ले रही है। हिंदू संगठन के लोगों ने नेपाल के घायलों के तीमारदारों के लिए खाने पीने का इंतजाम कराया। रैन बसेरे में उन्हें ठहराया गया।
बुधवार रात करीब ढाई बजे नेपाल से शिमला जा रही मिनी बस बैराज रोड पर माउंट लिट्रा स्कूल के पास चालक को नींद की झपकी लगने के कारण अनियंत्रित होकर दायीं ओर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई थी। इस हादसे में नेपाल के जिला रूकमपुर निवासी बलबहादुर, अनिल रोका व सबीन की मौत हो गई थी। तिलक, उमेशचंद्र, चंद्र प्रसाद, अर्जुन, दिनेश, रमेश, हरिवुड़ा, सेरमवुड़ा, ध्यान, संतोष, बृजबहादुर, शोभा, हरिबहादुर, टुक हरेपा, होमर घायल हुए थे। उमेश और चंद्र प्रसाद को मेरठ रेफर कर दिया गया था। बाद में मेरठ से दोनों बिजनौर आ गए। शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल से घायलों को रेफर कर दिया गा। यह रात भर अस्पताल में तड़पते रहे थे पर किसी ने इनकी सुध नहीं ली थी। हिंदू संगठन के लोग इनकी मदद के लिए आगे आए। शुक्रवार शाम सभी नेपालियों को इंदिरा बाल भवन के पास स्थित रैन बसेरे में ठहराया गया। नमामि गंगे के जिला संयोजक सौरभ सिंघल ने इनके खाने पीने का इंतजाम किया। शनिवार को मृतक अनिल रोका के परिजन ही बिजनौर आए व अनिल के शव को सुपुर्दगी में लिया। लाला लच्छूमल ने शव ले जाने के लिए बस का इंतजाम किया। हितेश, सुभाष वाल्मीकि, शूरवीर सिंह, मयंक मयूर ,बिजेंद्र समेत अन्य लोगों ने शव का अंतिम संस्कार करने के लिए अपने स्तर से मदद की। इन लोगों के साथ मिलकर परिजनों ने गंगा बैराज पर अनिल के शव का अंतिम संस्कार किया। मृतक सबीन व बलबहादुर के परिजन शव लेने नहीं आए। दोनों के शव जिला अस्पताल में मोर्चरी में रखे हैं। दो देश के लोगों का मामला होने के कारण दोनों के शव का बिना परिजनों के दाह संस्कार कैसे हो इस बारे में पुलिस आला अफसरों से राय ले रही है। शहर कोतवाल विजेंद्रपाल राणा के मुताबिक आला अफसरों का जो आदेश होगा, उसी के अनुरूप दोनों शवों के मामले में अंतिम कार्रवाई की जाएगी।