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अविश्वास प्रस्ताव से पहले जोड़तोड़ की राजनीति शुरू

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बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान से पूर्व जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है। शनिवार को दोनों खेमों ने अपने-अपने समर्थक जिला पंचायत सदस्यों की बैठक बुलाई। दोनों की बैठक में 25-25 सदस्य शामिल हुए। छह सदस्य बैठक में नहीं पहुंचे। ये सदस्य किसी खेमे के साथ नहीं हैं। बैठक से गायब रहे यह छह सदस्य ही जिला पंचायत अध्यक्ष का भविष्य तय करेंगे। इन सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए दोनों पक्षों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष उदयनवीरा के खिलाफ विपक्षी सदस्यों ने मोर्चा खोल रखा है। जिला पंचायत सदस्य साकेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में सदस्यों ने उदयनवीरा के खिलाफ डीएम जगतराज को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा गया था। अविश्वास प्रस्ताव पर 31 जुलाई को वोटिंग होनी है। जिला पंचायत में 57 जिला पंचायत सदस्य हैं। इनमें से एक की सदस्यता कोर्ट ने रद्द कर दी है। अब 56 सदस्य अविश्वास प्रस्ताव में मतदान करेंगे। शनिवार को दोनों खेमों ने अपने अपने समर्थक पंचायत सदस्यों के साथ गोपनीय बैठक की। बैठक में दोनों खेमों ने अपने समर्थकों के मन को टटोला और दूसरे पक्ष के सदस्यों को अपने पाले में लाने की रणनीति बनाई। सूत्रों का कहना है कि दोनों खेमों की बैठक में 25-25 सदस्य शामिल हुए। छह सदस्यों ने किसी भी खेमे की बैठक में भाग नहीं लिया। ये सदस्य अभी अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। चुनाव में इनका रुझान किसी भी दल की ओर हो सकता है। इन छह सदस्यों पर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी टिकी है। बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष उदयनवीरा खेमा अपने साथ 27 सदस्य होने का दावा कर रहा है, जबकि विपक्षी खेमा अपने साथ 32 सदस्य होने की बात कह रहा है। दोनों खेमों के समर्थकों ने बैठक से गायब रहे छह सदस्यों को अपने पक्ष में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। वहीं भाजपा ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अभी चुप्पी नहीं तोड़ी है। हालांकि सांसद भारतेंद्र सिंह खुलकर विरोधी खेमे के साथ हैं, लेकिन जिले के बाकी भाजपा नेताओं की खामोशी कुछ और ही बयां कर रही है।
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