‘आत्मनिर्भर होकर आत्मरक्षा करना भी सीखें महिलाएं’
बिजनौर। वर्धमान कॉलेज में बदलते परिवेश में स्त्री की भूमिका पर आयोजित सेमिनार के आखिरी दिन शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती वंदन किया गया।
टेक्निकल सेशन के चेयरपर्सन डा.सीएस शुक्ला, डा.विदुषी भारद्वाज, कोचेयरपर्सन डा.प्रीति खन्ना व डा.अलका साहू के निर्देशन में 167 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। प्राचार्य प्रोफेसर सीएम जैन ने कहा कि शिथिल न्याय व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार को और प्रयास करने होंगे। कहा कि जब तक हम सेमिनार के विषय से पूरी तरह नहीं जुड़ेंगे तब तक सफलता प्राप्त नहीं होगी। मुख्य वक्ता हिंदी के विद्वान डा.गिरिराज शरण अग्रवाल ने कहा कि आत्मनिर्भर होने के बाद भी महिलाएं आत्मरक्षा नहीं कर पा रही हैं। पालिकाध्यक्ष रुखसाना परवीन ने कहा कि जब वे इस पद पर पहुंच सकती हैं तो अन्य महिलाएं भी अपनी शक्ति को पहचानें। सुशील कर्णवाल ने नाक से बांसुरी बजाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य वक्ता योगेंद्रनाथ शर्मा अरुण ने सभी अपने संबंधों में आत्मीयता लाएं और सहनशील बनें। डा.सूर्यमणि रघुवंशी ने कहा कि स्त्री की गरिमा और प्रतिष्ठा को बाजारीकरण ने ठेस पहुंचाई है। बाजार केवल मुनाफे की बात करता है आदर्शों की नहीं। मुख्य अतिथि धामपुर शुगर मिल के सीओ संदीप शर्मा ने समाज में स्त्री की स्थिति अब पहले से बेहतर है। जो कुछ घट रहा है वह कुछ गलत मानसिकता वाले लोगों के कारण हो रहा है। संयोजिका डा.शशिप्रभा ने सेमिनार की सफलता के लिए सभी का आभार जताया। संचालन डा.अंजू बंसल व डा.रेशू शर्मा ने किया। इस दौरान डा.राजीव जौहरी, डा.प्रमोद कुमार, डा.ओपी सिंह, डा.प्रशांत कुमार आदि मौजूद रहे।