अमरोहा। पॉलीथिन पर प्रतिबंध का असर दूध के कारोबार पर पड़ेगा। शहर में चल रहे पचास डेयरियों पर रोजाना दस हजार लीटर दूध का कारोबार पॉलीथिन में होता है। यहां पहुंचने वाले ग्राहकों में पॉलीथिन में ही दूध दिया जाता है। ऐसे में अब ग्राहकों को वर्तन लेकर डेयरी पर पहुंचना होगा।
पॉलीथिन पर प्रतिबंध से डेयरी संचालकों में हड़कंप मच गया है। शहरभर में 50 से ज्यादा दूध की डेयरी संचालित हैं। जहां दुकानदार धड़ल्ले से लोगों को पॉलीथिन में दूध और पनीर बेच रहे हैं। डेयरी संचालकों की मानी तो शहर में रोजाना दस हजार लीटर से ज्यादा दूध केवल पॉलीथिन में भरकर ग्राहकों को दी जाती है। सरकार के आदेश से डेयरी संचालकों को कारोबार प्रभावित होने का खतरा मडराने लगा है।
बंद हो पॉलीथिन का उत्पादन
अमरोह। आनंदा डेयरी के डिस्ट्रीब्यूटर अभिषेक गुप्ता का कहना है कि सरकार पॉलीथिन के उत्पादन पर ही रोक लगा दे। जब पॉलीथिन बाजार में होगी ही नहीं तो दुकानदार इसमें दूध देना भी बंद कर देंगे। दूसरी बात लोग पॉलीथिन के दुष्प्रभावों से अनभिज्ञ हैं। इसलिए घरों से बर्तन लेकर नहीं आते। मजबूरन उन्हें पॉलीथिन में ही दूध व पनीर देना पड़ता है। पॉलीथिन पर बेन तभी कामयाब होगा जबकि लोग जागरूक हों और सरकार इसे उत्पादन पर पूरी तरह से रोक लगा दे।
जागरूकता के अभाव में पॉलीथिन में बिक रहा दूध
अमरोहा। कोर्ट चौराहा पर मदर डेयरी के संचालक जमशेद कमाल ने कहा कि पॉलीथिन में दूध बेचना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक है। लेकिन लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। इसलिए अपने घरों से बर्तन लेकर नहीं आते। यही वजह है कि ऐसे लोगों के लिए डेयरी पर पॉलीथिन रखनी पड़ती है। दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कि शाम को काम से लौटते वक्त लाजिमी रूप से दूध खरीदते हैं। इस दौरान उनके पास बर्तन नहीं होते हैं। यह भी एक वजह है कि पॉलीथिन में दूध बेचने को बढ़ावा मिल रहा है। लोग जागरूक होंगे तभी पॉलीथिन पर प्रतिबंध कामयाब होगा।
वितरक खुद ही दे जाते हैं पॉलीथिन
अमरोहा। मोहल्ला बडवाल नई बस्ती में किसान डेयरी के संचालक शाहिद हुसैन ने बताया कि डेयरी पर रोजाना दो से ढाई कुंतल दूध आराम से बेच लेते हैं। ज्यादातर लोग पॉलीथिन में दूध ले जाने के आदी हैं। इसलिए डेयरी पर दो चार किलो पॉलीथिन हर वक्त रखी रहती है। डेयरी पर पॉलीथिन की खपत की सप्लायरों को इतनी अच्छी जानकारी है कि खतम होने से पहले ही पॉलीथिन पहुंचवा देते हैं। लोग पॉलीथिन में दूध और पनीर ले जाने के इस कदर आदी हो गए हैं कि पहले तो वे बर्तन ही नहीं लाते और पॉलीथिन में दूध देने से मना करने पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं।
प्रतिबंध के लिए जनजागरूकता जरूरी
अमरोहा। कोर्ट चौराहे पर जन्नत डेयरी चलाने वाले मोहम्मद अजीम का कहना है कि पॉलीथिन पर प्रतिबंध सरकार का बढ़िया फैसला है। इससे न केवल पर्यावरण की हालत सुधरेगी बल्कि लोगों में प्लास्टिक के उपयोग के प्रति जागरूकता भी आएगी। लेकिन इसके लिए जनजागरूकता बहुत जरूरी है। मैं इसका पूरा समर्थन करता है। अब उन्हीं लोगों को दूध और पनीर दिया जाएगा जो अपने घरों से बर्तन लेकर आएंगे। क्योंकि सरकार के इस अभियान में सभी को सहयोग करना होगा। तभी बेन सफल हो पाएगा। इसके अलावा पॉलीथिन में दूध बेचने वाले दुुकानदारों और डेयरी संचालकों पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
समय की बचत और सुविधा के लिए ले जाते पॉलीथिन में दूध
अमरोहा। एक सरकारी विभाग में काम करने वाले फाजिल ने बताया कि आजकल की दौड़भाग की जिंदगी में समय प्रबंधन बहुत मुश्किल काम है। इसी के चलते सुबह शाम पॉलीथिन में दूध ले जाते हैं। इससे पहले तो घर से बर्तन लाने की जरूरत नहीं पड़ती दूसरे बर्तन को धोने के काम से छुटकारा मिल जाता है। घर ले जाकर दूध को सीधे उबाला या चाय बनाई और काम पर चले गए। इस प्रकार समय की बचत तो होती ही है। बर्तन में दूध ले जाने के झंझट से मुक्ति भी मिल जाती है।