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भयंकर बाढ़ आई तो सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बढेंगी मुश्किलें

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धन के अभाव में बाढ़ नियंत्रण की योजना धड़ाम
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धामपुर। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से बाढ़ नियंत्रण के लिए 2.25 करोड़ का बजट बनाकर शासन को भेजा था। लेकिन धन आवंटित न होने की वजह से 34 ऐसे कार्य हैं, जो अधूरे पड़े हैं। जबकि यह कार्य 15 जून से शुरू हो जाने चाहिए थे।
अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर डिवीजन में जनपद बिजनौर, मुरादाबाद और उधमसिंहनगर आंशिक रूप से आता है। यहां पर सबसे ज्यादा नुकसान रामगंगा नदी और खो नदी पहुंचाती है। इसी साल फरवरी, मार्च माह में क्षेत्र के विधायक अशोक राणा, नगीना लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. यशवंत सिंह और बढ़ापुर क्षेत्र के विधायक सुशांत सिंह ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। जिसके बाद उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वह संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाकर प्रगति रिपोर्ट देना शुरू कर दें। अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों के अनुरूप कार्य योजना तैयार कर शासन को भेजी, यह सभी कार्ययोजनाएं शासन स्तर से मंजूर भी हो गई हैं। लेकिन अभी तक शासन की ओर से अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर डिवीजन को धन का आवंटन नहीं किया जा सका है।
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30 लाख में केवल छह ही कार्य हुए पूरे : एक्सईएन
विभाग के अधिशासी अभियंता रामबाबू सिंह ने बताया कि डिवीजन में अभी तक केवल 30 लाख की लागत से बाढ़ निरोधक कार्य हो पाए हैं। सवा दो करोड़ की लागत से तीनों जिले में करीब 25 बाढ़ निरोधक कार्य होने प्रस्तावित हैं। पर जब विभाग के पास धन नहीं है तो वे इसमें क्या टिप्पणी कर सकते हैं। इन कार्ययोजनाओं में जो अतिसंवेदनशील छह पाइंट थे, उन सभी पर कार्य पूरा कराया जा चुका है। बाकी काम ऐसे ही पेंडिंग हैं।

आपातकालीन योजना के धन से होंगे बाढ़ निरोधक कार्य
एक्सईएन बताते हैं कि क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनती है तो अधिकारियों के लिए इससे बच पाना बहुत मुश्किल होगा। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजकर अवगत करा चुके हैं। 30 लाख की लागत से जहां पर काम हुआ है, उन कामों में पीली बांध क्षेत्र, नंदगांव, नाथाडोई, नजीबाबाद के खैरूल्लापुर, नंगला भज्जा शामिल हैं। जब अधिकारियों से पूछा कि ऐसे हालातों में वे बाढ़ की त्रासदी से कैसे बचाएंगे तो बताया कि वह आपातकालीन योजना के धन को बाढ़ निरोधक कार्य कराने पर खर्च करेंगे।
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कडूला नदी में भी हर साल आती है बाढ़
क्षेत्र के गांव भवानीपुर तरकौला, सलावा, अलादीनपुर, चाकरपुर पोटी पोटा के ग्रामीण पंकज कुुमार, मदन सिंह, महावीर सिंह, विमल कुमार ने बताया कि उनके क्षेत्र में कडूला नदी प्रवाहित होती है। जब गांगन नदी में बाढ़ आती है तो कडूला नदी में भयंकर बाढ़ की स्थिति भी बन जाती है। जिससे किसानों की सैकड़ों हेक्टेयर फसलें बाढ़ के कारण नष्ट हो जाती है। कई गांवों में पानी घुस जाने से लोगों में हाहाकार मच जाता है। ऐसी स्थिति राम गंगा के तट पर आलमपुर गांवड़ी, भज्जावाला, हाफिज बिहारीपुर, मुबारकपुर कुंडा, सिपाहियोंवाला, ज्योतहिम्मा, टांडा बेरखेड़ा, मुहम्मदपुरसादा, नंदगांव नाथाडोई, उमरपुर बांगर आदि गांवों में बरसात के दिनों रामगंगा और खौ नदी में पहाड़ों पर अधिक बारिश होने से भयंकर बाढ़ की स्थिति बन जाती है।
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