हसनपुर। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे न्यायिक तहसीलदार पर कार्रवाई की गाज गिर ही गई। वकीलों से पंगा लेना न्यायिक तहसीलदार को महंगा पड़ गया। अधिवक्ताओं द्वारा स्थानीय विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी से शिकायत करने के 72 घंटे बाद डीएम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें मुख्यालय पर अटैच कर लिया है। जबकि धनौरा के न्यायिक तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी है। अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार वापस लेने की घोषणा कर दी है।
बार एसोसिएशन काफी समय से न्यायिक तहसीलदार की कार्यशैली से नाराज चल रहे थे। अधिवक्ताओं ने उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। न्यायालय का बहिष्कार कर जिलाधिकारी और कमिश्नर को शिकायती पत्र देकर हटाने की मांग की थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 21 अगस्त को अधिवक्ताओं ने विधायक महेंद्र सिंह से मुलाकात कर न्यायिक तहसीलदार की कार्यशैली से नाराजगी जताई थी। विधायक ने उन्हें हर संभव कार्रवाई का आश्वासन दिया था। विधायक के शिकायत के 72 घंटे बाद डीएम हेमंत कुमार ने न्यायिक तहसीलदार पर कार्रवाई पर कार्रवाई करते हुए मुख्यालय बुला लिया है। जिसके बाद वकीलों ने खुशी की लहर दौड़ गई। बार अध्यक्ष गंगा सरन खड़गवंशी और महासचिव चंद्रसेन अग्रवाल और पूर्व अध्यक्ष मुजाहिद चौधरी ने बताया कि 25 अगस्त से कार्य बहिष्कार समाप्त कर दिया जाएगा। डीएम हेमंत कुमार ने बताया कि हसनपुर न्यायिक तहसीलदार को हटाकर मुख्यालय बुला लिया गया है। उनकी जगह धनौरा न्यायिक तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी गई है।