नजीबाबाद। मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सूकरो नदी पर बने पुल की एप्रोच कटने से हाईवे पर भारी यातायात रुक गया। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच आवागमन का एकमात्र मार्ग होने के चलते पुल के आधे हिस्से से जोखिम उठाकर वाहन गुजरते रहे।
उत्तराखंड के कोटद्वार में बादल फटने से सूकरो नदी में आए उफान ने कई जगह तबाही मचाई। नजीबाबाद से करीब 18 किलोमीटर दूर सूकरो नदी पर बने सड़क पुल की नजीबाबाद छोर की एप्रोच मिट्टी कटान के साथ धराशायी हो गई। पुल से जुड़ा हाईवे का करीब आधा हिस्सा कटने से मार्ग पर यातायात ठहर गया। चार पहिया हल्के वाहन मार्ग के आधे हिस्से से जोखिम उठाकर गुजरते रहे। कुछ रोडवेज बसों और ट्रकों के चालक लोगों द्वारा मना करने के बावजूद वाहनों को पुल के ऊपर से खतरनाक ढंग से निकालकर ले गए। लोनिवि एनएच विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। दोपहर तक बचाव कार्य शुरू नहीं हो सका था। सूकरो नदी की धार पुल के नीचे लगातार मिट्टी कटान कर रही थी। सूकरो नदी पर करीब डेढ़ दशक पूर्व पुल का निर्माण हुआ था। 10-10 मीटर के गैप से सात स्पॉन पर निर्मित पुल की लंबाई करीब 70 मीटर है। नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच रेल यातायात बंद होने के बाद अब आवागमन का एकमात्र रास्ता सड़क पुल ही बचा है। सड़क पुल की एप्रोच में भी लगातार कटान होने से नजीबाबाद-कोटद्वार के बीच संपर्क कटने की आशंका बनी है। सड़क पुल को बचाने के प्रति लोनिवि नजीबाबाद एवं एनएच विभाग के अधिकारी भी गंभीर नजर नहीं आ रहे। जुलाई 2016 में खबरें प्रकाशित कर अमर उजाला ने दोनों ही विभागों के अधिकारियों को चेताया था कि सूकरो नदी में दोबारा उफान आया, तो सड़क पुल को खतरा बढ़ सकता है, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था।