जिले में चिह्नित हुए 21 अनाथ बच्चे
बिजनौर। शासन कोरोना से अनाथ बच्चों के रोटी, कपड़ा तथा मकान के साथ पढ़ाई लिखाई का इंतजाम करेगा। बालिकाओं की शादी कराई जाएगी। साथ ही स्कूल तथा व्यवसायिक पाठ्यक्रम में पढ़ रहे बच्चों को लैपटॉप दिया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की गई है। उधर, जिले में इस तरह के 21 बच्चों को अब तक चिह्नित किया जा चुका है।
कोरोना महामारी में अनेक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाने वाला भी चला गया है। बच्चे अनाथ हो गए हैं। ऐसे बच्चों के समक्ष पेट भरने, रहने तथा देखभाल की समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन अनाथ बच्चों का गांव, कस्बे व शहरों में पता लगाने में लगा है। इस काम में गांव में तैनात स्वास्थ्य विभाग की आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगे हैं।
जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि अभी तक जिले में 21 अनाथ बच्चे मिले हैं। जिनके माता-पिता की कोरोना से मौत हो गई है। शासन ने कोरोना से मृत अनाथ बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की है। योजना की लाभ पहुंचाने वाली पांच श्रेणी हैं। इसमें अनाथ बच्चों के पालन-पोषण से लेकर उच्च व व्यवसायिक शिक्षा के साथ बालिकाओं की शादी के लिए अनुदान दिए जाने की व्यवस्था है।
योजना की पात्रता
1- कोविड -19 के कारण माता-पिता दोनों यदि उनमें से एक ही जीवित थे, तो उनकी, अथवा यदि माता-पिता दोनों नहीं है तो लीगल अभिभावक की मौत हो गई है।
2- माता-पिता में से एक आय अर्जित करने वाले अभिभावक को खो दिया हो।
योजना के लाभ की श्रेणी
1- अनाथ बच्चे की देखभाल करने वाले संरक्षक को 4000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चे की दर से मिलेंगे।
2- दस साल से कम आयु के ऐसे बच्चे जिनके संरक्षक नहीं है, उन्हें राजकीय बाल गृह शिशु में आवासित किया जाएगा।
3- अव्यस्क बच्चियों की देखभाल व पढ़ाई लिखाई कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय या राजकीय बालिका गृह में होगी। इसके लिए सूबे में 13 बालिका गृह तथा 18 अटल आवासीय विद्यालय चिह्नित किए गए हैं।
4- बालिकाओं की शादी के लिए एक लाख एक हजार रुपये दिए जाएंगे।
5- स्कूल में पढ़ने वाले अथवा व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण करने वाले सभी बच्चों को लैपटॉप/ टैबलेट दिए जाएंगे।
यहां है राजकीय बाल गृह शिशु
रामपुर, आगरा, मथुरा तथा प्रयागराज। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि जिले से शून्य से दस आयु के बच्चे पालन पोषण के लिए रामपुर भेजे जाते हैं।