स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें बच्चे : डीएम
बिजनौर। शुक्रवार को स्कूलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर विद्यार्थियों को पेट के कृमि मुक्ति की दवा एल्बेंडाजोल खिलाई गई। बच्चों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया।
डीएम अटल कुमार राय ने मॉडर्न एरा पब्लिक स्कूल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन समारोह का उद्घाटन किया। डीएम ने अपने हाथों से विद्यार्थियों को कृमि नियंत्रण की दवा खिलाई। समारोह में विद्यार्थियों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। छोटे बच्चों के नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। डीएम ने कहा कि कृमि(कीड़े) दूर करने के उपाय बताए। उन्होंने एक साल में दो बार इसकी दवा खाने को कहा। डीएम ने कहा कि विद्यार्थी अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से डा.शैलेश जैन, डा.रोहताश कुमार, डीआईओएस राजेश सिंह, डीएमओ प्रवीण कुमार, पूनम रानी, नितिन गौड़, संकेत गहलौत, डा.शोएब जैदी, एनके वर्मा, डा.जीबी कटारिया आदि मौजूद रहे।
बिजनौर पब्लिक स्कूल में उपप्रधानाचार्य आनंद पाल ने पेट में कीड़ों से होने वाली हानियों के बारे में बताया। छह से 19 साल तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाई गई। चेयरपर्सन सुशीला सिंह ने बच्चों को अपने हाथों से गोली खिलाई।
कृमि संक्रमण की जानकारी दी
नगीना। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के मौके पर हिंदू इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एस एस लाल ने कहा कि पेट में कीड़े होने के कारण कृमि संक्रमण से खून की कमी व कुपोषण की समस्या हो जाती है।कक्षा छह से 12 तक के एक हजार से अधिक छात्र छात्राओं को एल्बेंडाजोल टैबलेट वितरित की गई।
कॉलेज में शुक्रवार को प्रार्थना सभा पर प्रधानाचार्य एसएस. लाल ने सफाई का विशेष ध्यान रखने की अपील करते हुए कहा कि शौच के बाद व भोजन से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोने चाहिए। साफ पानी एवं ताजे फलों व भोजन का प्रयोग करना चाहिए। खुले में शौच न करें और आसपास सफाई रखें। रनवीर सिंह, यशवीर सिंह, प्रदीप जैन, पवन त्यागी, धीरज कुमार, प्रशांत त्यागी, अमित कुमार, भानू प्रकाश,धर्मपाल सिंह, मनोज कुमार, दिव्यकान्त शर्मा, जेके राणा मौजूद रहे।
बच्चों का वजन होने लगता है कम
नींदडू़। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र धामपुर के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा पीके गुप्ता ने बताया कि बच्चों में आमतौर पर राउंड कृमि, व्हिप कृमि और हुक कृमि तीन प्रकार के कृमि पाए जाते हैं। ये कृमि परजीवी होते हैं तथा जीवित रहने के लिए मनुष्य की आंत में रहते हैं। ये प्राय: नंगे पैर खेलने, बिना हाथ धोए खाना खाने, खुले में शौच करने तथा साफ-सफाई नहीं रखने से हो जाते हैं। इनके संक्रमण से खून की कमी, कुपोषण, भूख न लगना, कमजोरी और बेचैनी, पेट में दर्द, जी मचलाना, उल्टी और दस्त आना तथा वजन में कमी आने लगती है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर इस गोली को एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को खिलाया जाता है। डा गुप्ता के अनुसार आंगनबाड़ी के अधीन रहने वाले एक से तीन वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर तथा विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को उनके विद्यालयों में कृमि से मुक्ति की गोली खिलाई जाएगी। आंगनबाड़ी और स्कूल से विरक्त रहने वाले बच्चों को आशा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ले जाकर गोली खिलवाएगी।