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आज से शुरु हुआ सड़क सुरक्षा सप्ताह

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बिजनौर। सड़क सुरक्षा, जीवन रक्षा को आधार मानते हुए भारत सरकार के निर्देशानुसार परिवहन विभाग की ओर से एमडी इंटरनेशनल स्कूल में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। इस अवसर पर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरुक कर अपने नाबालिग बच्चों को वाहन नहीं देने की अपील की गई। गोष्ठी में करीब 250 बच्चों ने प्रतिभाग किया।
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सोमवार को एमडी इंटरनेशनल स्कूल में हुई गोष्ठी का शुभारंभ डीएम अटल कुमार राय, एसडीएम सदर इंद्रजीत सिंह , पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह, डीआईओएस राजेश कुमार, बीएसए महेश चंद ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर डीएम ने कहा कि सभी अभिभावक अपने बच्चों से मित्रवत व्यवहार करें। नाबालिग बच्चों के हाथों में वाहन न दें। सभी लोग सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक हों। डीएम ने कहा कि हम शौक में अपने बच्चों को वाहन दे देते हैं और इसके दूरगामी परिणाम के बारे में नहीं सोचते। इससे सड़क दुर्घटनाएं बढ़ती हैं और कई घरों के चिराग बुझ जाते हैं। एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार ने कहा कि पहले यातायात नियमों का बारीकि से अध्ययन से करें। उसके बाद ही वाहन को लेकर सड़क पर चलना चाहिए। यदि हम स्वयं जागरूक होंगे तो सभी लोगों को हम यातायात नियमों को भली भांति सिखा सकते हैं। दोपहिया वाहन चालक हेलमेट और चौपहिया वाहन चालक सीट बेल्ट का प्रयोग करें। केवल पुलिस और परिवहन की विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए ही यातायात नियमों का पालन न करें, बल्कि स्वयं और अपने परिवार के बारे में सोचकर तथा अपनी जिम्मेदारी समझकर यातायात नियमों का पालन करें। इस अवसर पर एआरटीओ प्रवर्तन रमेश कुमार चौबे, आरआई अरविंद कुमार सिंह, विद्यालय के प्रबंधक कुलदीप जैन, एनसीसी कैडेट्स, स्काउट, गाइड आदि मौजूद थे।
अधिकारियों ने बच्चों से मांगे सुझाव
गोष्ठी में विभिन्न कक्षाओं के करीब 250 बच्चों ने प्रतिभाग किया। सड़क सुरक्षा और यातायात के नियमों को और अधिक प्रभावशाली कैसे बनायें इसके लिए अधिकारियों ने बच्चों से विचार साझा किये और उनके सुझाव मांगे। बच्चों ने बड़े ही सुंदर ढंग से जवाब दिये। एक बच्चे का सुझाव था यातायात के नियमों को तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाती है तो अच्छे कार्य करने वालों को पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
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नियमों का पालन हो तो बच सकती है जान
अपनी व दूसरों की जान की कीमत समझें जिलेवासी
फोटो 22,23
बिजनौर, 23 अप्रैल
लापरवाही व यातायात नियमों का पालन न करने पर हो रहे हादसों राहगीरों की जान लील रहे हैं। नियमों का पालन किया जाए तो सड़क हादसों को 80 प्रतिशत से भी कम किया जा सकता है। लेकिन वाहन स्वामी नियमों के प्रति जागरूक नहीं हैं। यातायात नियमों का पालन करने के लिए यातायात सुरक्षा सप्ताह का सोमवार को शुरू हो गया। राहगीरों को अपनी यात्रा को सुरक्षित रखने के लिए खुद भी सुरक्षा इंतजाम से जुड़ना होगा।
एक अनुमान के अनुसार पिछले साल हुए सड़क हादसों में करीब 400 राहगीरों की मौत हुई थी। राहगीर खुद ही अपनी जान के दुश्मन बने हुए हैं। सड़कों पर यातायात नियमों की कोई परवाह नहीं की जाती है। बड़े वाहन ओवरलोड होकर दौड़ते हैं। उनकी फिटनेस पर भी किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जाता है। युवा हेलमेट को छूना तक पसंद नहीं कर रहे हैं। स्कूल-कॉलेज में सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान तो बताए जाते हैं लेकिन हेलमेट का प्रयोग करने के बारे में इतना ज्यादा नहीं बताया जाता। युवतियां भी यातायात के नियमों को तोड़ने में पीछे नहीं हटती हैं। यातायात के नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस को सख्ती दिखानी पड़ती है। पुलिस के ये अभियान भी कुछ दिन ही चलकर बंद हो जाते हैं। नागरिक रोज हो रहे सड़क हादसों में जान माल के नुकसान को देखकर भी चेतने को तैयार नहीं हैं। गांवों में संपर्क मार्गों के पास देखकर सड़क पर न आने से हर साल दर्जनों जान जा रही हैं। केवल यातायात नियमों का पालन करके 80 प्रतिशत से अधिक हादसे होने से रोके जा सकते हैं।
सीओ सिटी गजेंद्रपाल सिंह के मुताबिक यातायात नियमों का पालन करना खुद का भी दायित्व बनता है। सभी अपनी व दूसरों की जान की कीमत समझते हुए यातायात नियमों का पालन करें। पुलिस यातायात नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
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इन नियमों का करें पालन
-शराब पीकर वाहन न चलाएं।
-बाइक चलाते वक्त हेलमेट जरूर लगाएं।
-कार में सीट बैल्ट लगाकर बैठें।
-वाहन चलाते वक्त मोबाइल पर बात न करें।
-बाइक पर ट्रिपल राईडिंग न करें।
-वाहनों को लहराकर न चलाएं।
-चौराहों व स्कूल के पास वाहनों की स्पीड कम रखें।
-संपर्क मार्ग से मुख्य मार्ग पर आते समय दोनों ओर देखें।
-नाबालिग वाहन न चलाएं।
-यात्री वाहनों में क्षमता से अधिक यात्री न बैठाएं।
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