सालभर में एंबुलेंस में गूंजीं 20 किलकारियां
बिजनौर। गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही सतर्क हैं। एंबुलेंस में भी प्रशिक्षित स्टाफ होता है, जो गर्भवती महिला की स्थिति खराब होने पर एंबुलेंस में ही डिलीवरी करा सकता है। बीते सत्र में जिले में एंबुलेंस के अंदर 20 किलकारियां गूंजीं। इस दौरान एंबुलेंस के अंदर किसी की भी जान नहीं गई।
मातृ व शिशु की जान को किसी तरह की हानि न पहुंचे, इसके लिए कई तरह स्वास्थ्य विभाग कमर कसे हुए है, लेकिन कभी-कभी इलाज न मिलने से मरीज की जान पर बन आती है। गंभीर स्थिति में महिला की एंबुलेंस में ही डिलीवरी करा दी जाती है। जिले में सत्र 2021 में 20 डिलीवरी एंबुलेंस के अंदर हुई हैं। एंबुलेंस में मौजूद स्टाफ को ऐसी स्थिति को संभालने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। वहीं इस सत्र में जिला महिला अस्पताल में 2947 डिलीवरी हुई हैं, जिनमें से 1967 नॉर्मल और 980 सर्जरी डिलीवरी शामिल हैं।
समय से अस्पताल में कराएं भर्ती : सीएमएस
महिला जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. प्रभा रानी ने बताया कि गर्भवती महिला को लेबर पेन शुरू होने से डेढ़ घंटे के अंदर अस्पताल में भर्ती करा देना चाहिए। अगर किसी महिला को दौरा पड़ने लगता है, तो हालत गंभीर हो जाती है। गर्भवती महिला को समय से अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।
स्टाफ को किया गया प्रशिक्षित
102, 108 एंबुलेंस के जिला प्रोग्राम मैनेजर गिरीश पुरोहित ने बताया कि एंबुलेंस के स्टाफ को प्रसव की गंभीर हालात के लिए प्रशिक्षित किया गया है। स्टाफ को हैदराबाद ट्रेनिंग सेंटर पर प्रशिक्षित किया जाता है। ऐसे में स्टाफ जरूरत पड़ने पर प्रसव कराता है। इस साल जिले में एंबुलेंस के अंदर 20 डिलीवरी हुई हैं।