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तीन करोड़ खर्च के बाद भी नहीं हुआ जलभराव की समस्या का निदान

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दो दिन में ही उखड़ी आवास-विकास की सड़क
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बिजनौर।
बरसात में आवास-विकास कॉलोनी जलभराव की समस्या से जूझ रही है। इस समस्या से निदान के लिए पिछले तीन साल में करीब तीन करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस है। कल हुई बारिश में कॉलोनी में दो से तीन फिट तक पानी भरा। दो दिन पहले डाली गई सड़क पहली ही बारिश में उखड़ गई। इसे देखकर लोगों का आक्रोश भड़क उठा। उन्होंने विकास कार्यों की जांच के लिए आई टीम के सामने ही जेई से धक्का-मुक्की की और उनके ट्रांसफर की मांग की।
आवास-विकास कॉलोनी में सालों से जल निकासी समस्या है। बारिश में कॉलोनी के तमाम घरों में पानी भर जाता है। बारिश के कई दिन बीतने के बाद भी कॉलोनी की सड़कों पर पानी जमा रहता है। इसकी शिकायत कॉलोनीवासियों ने मंडलीय विभाग से की थी। दो दिन पहले कॉलोनी में सड़क बनवाई गई थी। बृहस्पतिवार को हुई बारिश में ही सड़क की परतें उखड़ गईं। शुक्रवार को मामले की जांच करने मुरादाबाद मंडल से अधिशासी अभियंता जेपी द्विवेदी, अधीक्षण अभियंता आरबी यादव व सहायक अभियंता फराज असलम पहुंचे। इसका पता चलते ही नागरिकों ने उनकी गाड़ी का घेराव किया। मोहल्लेवालों ने अधिकारियों के सामने ही आवास-विकास परिषद के जेई ओमपाल सिंह पर भष्ट्राचार के आरोप लगाते हुए धक्का-मुक्की की।
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सेवानिवृत्त इंजीनियर रामपाल सिंह, भोलानाथ त्यागी, विमलेश चौधरी आदि ने अधिकारियों को बताया कि मोहल्ले की टंकी सालों से साफ नहीं की गई है। हल्की सी बारिश में कॉलोनी के घरों में पानी भर जाता है। नई सड़क दो दिन में ही उधड़ गई। कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया कि जेई ने अपना ट्रांसफर होने के बाद भी ठेकेदारों से कमीशन लेने के लिए मानकों के विपरीत सड़क का निर्माण कराया है। पानी कॉलोनी से बाहर निकलने के बजाय पार्क में जाता है। सुभाष शर्मा ने सड़क में हो रहे गोलमाल की शिकायत आला अफसरों से की थी। इसके बाद ही टीम जांच को बिजनौर आई थी।
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नाला बनवाना भी नहीं आया काम
आवास विकास के पानी की निकासी के लिए लगभग 25 साल पहले जिला पंचायत ने दस लाख की लागत से नाला बनवाया, पर लाभ नहीं हुआ। तीन साल पूर्व इंदिरा पार्क से होकर एक करोड़ नब्बे लाख रुपये की लागत से नाला बना। यह नाला पिछली बरसात में टूट गया। लगभग दस लाख रुपये से इसे ठीक किया गया। कॉलोनी की पानी की समस्या के निदान के लिए सुरेंद्र नगर और वीआईपी कॉलोनी से भी एक करोड़ सात लाख की लागत से नाला बनाया गया। इस नाले को कॉलोनी के पास बने तालाब से जोड़ा जाना था, लेकिन नहीं जोड़ा गया। परिणाम यह हुआ कि यहां भी जलभराव होने लगा। यहां का पानी आवास-विकास कॉलोनी में जाकर समस्या पैदा करने लगा।
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