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... ऐ मां तेरी दुआ से बुरा वक्त टल गया

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... ऐ मां तेरी दुआ से बुरा वक्त टल गया
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नहटौर। उर्दू अदब के तत्वावधान में होली मिलन के उपलक्ष्य में शेरी नशिस्त मौहल्ला ईदगाह निवासी अकील अंसारी के आवास पर आयोजित की गई। नशिस्त का उद्घाटन समाजसेवी हाफिज अथर हसन, सुधाराज सिंह डवास और नवाजिश अली ने संयुक्त रूप से शमा रोशन कर किया। नशिस्त का आगाज शम्स नहटौरी की नात ए पाक से हुआ।
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अकबर नहटौरी ने कुछ यूं कहा ‘दुशमनों का यू हीं नाम बदनाम है, जख्म जब भी मिले दोस्तों से मिले’। आलम देहल्वी ने ‘उम्र कम पड़ गई अहसान उतारे न गए, जिन्दगी तेरी इनायत ने सोने न दिया’, अल्ताफ अंसारी ने ‘दुश्मन ने तो मिटाने में कोई कमी न की, ऐ मां तेरी दुआ से बुरा वक्त टल गया, शम्स नहटौरी ने ‘मुद्दतों हुआ यूं भी सूखी रोटियां हमने, रात को भिगोदी है और सुबह खा ली है’, खुर्शीद अनवर ने ‘खामी उसमें जरूर है कोई, ऐब जो दूसरों में ढूंढता है’, शाद फरीदी ने ‘जुल्म की यह आखिरी मंजिल है कर देना रकम, जब किसी मासूम के हाथों में पत्थर देखना’, देहरादून के बदरूद्दीन जिया ने ‘अमीरे शहर के कब तक कसीदे लिखोगे, कभी गरीब के अश्कों में भी डुबाओ कलम’ सुना कर खूब वाहवाही लूटी। इनके अलावा अकील अंसारी, बेदिल कलकत्तवी, काजी शिराज आदि ने भी अपने कलाम से महफिल को रौनक बख्शी। नशिस्त की सदारत हसन और निजामत आलम देहलवी ने की। इस मौके पर डा अजहर, महराब अहमद, रईस उस्मानी, जावेद इकबाल, शादाब आदि गणमान्य लोग मौजूद थे।
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