‘... रहे कहीं भी दिल में हिंदुस्तान तो जिंदा है’
बिजनौर। जिला कृषि, औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी में विराट अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कवियों ने देशप्रेम के तराने बिखेरे। फिल्मी गीतकार संतोष आनंद ने अपनी रचनाएं सुनाकर देर रात तक समा बांधे रखा।
कवि सम्मेलन की शुरुआत मनोज त्यागी की सरस्वती वंदना से हुई। गीतकार डा. सोम ठाकुर का गीत खूब पसंद किया गया ‘आ ना जाए कहीं, नींद इतिहास को, जागरण कीजिए ‘जागरण कीजिए, शंख से बांसुरी का वरण कीजिए’। ओज कवि गजेंद्र सोलंकी की इन पंक्तियों पर खूब दाद मिली ‘एक सभ्यता, एक संस्कृति अपना इतिहास बताता है, जाति पंथ सब भले अलग हो, खून तो पर हिंदुस्तानी है’। उनकी यह पंक्तियां भी बार-बार सुनी गई ‘भारत के परिंदों की जग में पहचान तो जिंदा है, रहे कहीं भी दिल में हिंदुस्तान तो जिंदा है’। डा. प्रवीण शुक्ल ने श्रोताओं को बार-बार तालियां बजाने पर विवश किया। उनकी यह पंक्तियों बार बार सुनीं गईं ‘मेरे मुंह पर जिसने तारीफों के पुल बांधे हैं, जरा पीठ फिरते ही उसका पीछे से खंजर चलता है’।
उनकी इन पंक्तियों को भी खूब दाद मिली ‘दौलत और ताकत के दम पर खुद को खुदा समझ बैठे जो, भूल गए वो जर्रा-जर्रा उसकी मर्जी पर चलता है।
फिल्मी गीतकार संतोष आनंद की बारी आई तो श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया। संतोष आनंद ने पढ़ा ‘ये जग वाले खुशियों का भी दम भरने नहीं देते, जीने भी नहीं देते, मरने भी नहीं देते’। उनकी इन पंक्तियों ने भी जोश भरा ‘हमने भी कभी पलकों पर आकाश उठाया
था, चंदा-तारों से अपने गीतों को सजाया था’। कवि सम्मेलन में डा. रुचि चतुर्वेदी, हास्य कवि अनिल अग्रवंशी, डा. राजकुमार रंजन की रचनाओं ने भी
श्रोताओं को बांधे रखा। कवि सम्मेलन में मुरादाबाद से आए वरिष्ठ पत्रकार सुशील शर्मा, वीरेशबल, अनूप खन्ना, आलोक गोविल, भाजपा
अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष इरशाद अहमद, सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
कवि सम्मेलन सुबह तीन बजे तक चला। कवि सम्मेलन का संचालन डा. प्रवीण शुक्ल ने किया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि अपर मंडलायुक्त एसबी तिवारी, पालिका चेयरपर्सन रुखसाना परवीन, अधिशासी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शमशाद अंसारी ने संयुक्त रूप से मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य अतिथि व सभी कवियों का कार्यक्रम संयोजक ज्योतिलाल शर्मा, मुकुल राठौर, कार्यक्रम अध्यक्ष दीपक गर्ग, संजय विश्नोई ने माल्यार्पण व बैज लगाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में अभिनंदन सत्र का संचालन पंकज भारद्वाज ने किया।
जब व्हील चेयर से खड़े हो गए संतोष आनंद
अस्वस्थ व व्हीलचेयर पर होने के बावजूद गीतकार संतोष आनंद को जब कवि सम्मेलन के दौरान बिजनौर के लोगों ने अपनी तालियों के माध्यम से जोश भरा तो वे भी खुद को रोक नहीं पाए। ।अप
न प्रसिद्ध गीत ‘इक प्यार का नगमा है...’ गाना शुरू कर दिया और व्हील चेयर से खड़े हो गए। लगभग 80 साल के संतोष आनंद ने अपने चाहने वालों के मोहब्बत को देखकर यह भी कहा कि लोग उन्हें अस्वस्थ न समझे। वह बूढ़े नहीं हुए अभी जवान हैं और लोगों के दिलों में यूं ही बने रहेंगे।