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1-छतीसगढ़ में नक्सली हमले में हसनपुर का लाल आईटीबीपी जवान शहीद

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छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में हसनपुर का लाल शहीद
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अमरोहा/हसनपुर।
छत्तीसगढ़ के जिला नारायपुर में आईटीबीवी कैंप पर हुए नक्सली हमले में हसनपुर तहसील के थाना सैदनगली क्षेत्र के गांव भदौरा का लाल शहीद हो गया। अमरोहा जनपद के इस लाल के शहीद होने की खबर जब गांव पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया। गांव में मातम छा गया। परिवार वाले सुुधबुध खो बैठे हैं। जवान के पार्थिव शरीर के गांव आने के इंतजार में जवान के घर पर नाते रिश्तेदारों का तांता लगा हुआ है। राजनीतिक दलों के नेताओं का पीड़ित परिवार को सांत्वना देने का सिलसिला जारी है।
हसनपुर तहसील के थाना सैदनगली क्षेत्र के गांव भदौरा के किसान जमात अली के बेटे अरशद अली (25) की इंडियन तिब्बत बार्डर पुलिस (आईटीबीपी) में आठ जनवरी 2012 में रायबरेली में भर्ती हुई है। दो साल से छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला स्थित आईटीबीपी बटालियन में तैनाती चल रही थी। इन दिनों जिला रायपुर बटालियन से सटे जिला नारायणपुर में तैनाती चल रही थी। रविवार की शाम करीब छह बजे नक्सलियों ने जिला नारायणपुर क्षेत्र में आईटीबीपी कैंप पर हमला बोल दिया। जिसमें एक गोली जवान अरशद अली के सीने में जा लगी। परिजनों को मिली जानकारी के मुताबिक गंभीर हालत में अरशद अली को रायपुर बटालियन के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उपचार के दौरान दो घंटे बाद ही अरशद अली की मौत हो गई। सोमवार दोपहर एक बजे तक पोस्टमार्टम हो गया था। जवान के पार्थिव शरीर को रायपुर बटालियन ले जाने के बाद हवाई जहाज से दिल्ली लाने की बात कही गई है। दिल्ली से पार्थिव शरीर सड़क के रास्ते वाहन से देर रात पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
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भाई के गोली लगने की खबर सुन कर गश खाकर गिरा बड़ा भाई
अमरोहा। आईटीबीपी जवान अरशद अली छह भाइयों में तीसरे नंबर का था। अरशद अली से बड़े भाई राशिद अली, इशरत अली हैं। जबकि मोहम्मद गुफरान, बुरहान उस्मानी, नावेद अली छोटे हैं। परिजनों ने बताया कि नक्सली हमले का वाक्या रविवार की शाम करीब छह बजे का था। उसी समय अरशद के गोली लगी थी। करीब साढ़े छह बजे आईटीबीपी बटालियन से राशिद अली के मोबाइल पर कॉल आई थी। जिसमें राशिद के गोली लगने से जख्मी होने की सूचना मिली थी। बताया गया था कि अरशद को अस्पताल ले जा रहे हैं। खबर सुन कर राशिद वहीं गश खाकर गिर गया। परिजनों ने संभाला। खबर सुन कर राशिद अपने चचेरे भाई मोहम्मद इदरीश और मोहम्मद आरिफ के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए। राशिद ने बताया कि वह निजी वाहन से गजरौला से कुछ आगे तक ही पहुंच सके थे। इसी दौरान बटालियन से फिर से कॉल आई। जिसमें अरशद अली के शहीद होने की सूचना मिली। साथ ही उन्हें छत्तीसगढ़ आने से रोक दिया गया। जिससे वह वापस लौट आए।
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