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शायरों ने शेरी नशिस्त में पढ़े उम्दा कलाम

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शायरों ने शेरी नशिस्त में पढ़े उम्दा कलाम
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डॉ.आफताब और जफर रहमानी हुए सम्मानित
फोटो - 26एनजेडबी04आर
नजीबाबाद। बज्म-ए किशवर की ओर से आयोजित शेरी नशिस्त में शायरों ने शानदार कलाम पेश किए। इस मौके पर जफर रहमानी और डॉ.आफताब नोमानी को किशवर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
मदरसा नूरुल उलूम रम्पुरा में शायर किशवर नजीबाबादी की याद में आयोजित शेरी नशिस्त का आगाज मोहम्मद शर्फी ने नाते पाक से किया। डॉ.इल्यास ने गैरों में इतनी हिम्मत होती नहीं कभी भी/अपना ही कोई मगर गर्दन उतारता है..., इंडियन नगीनवी ने जुर्म अधिक स्टाफ है कम, थानेदार की नाक में दम..., डॉ.साबिर ने मुनासिब हो तो दे देना सजाए मौत ही मुझको, मगर तफतीश लाजिम है किसी इल्जाम से पहले..., कारी शाकिर ने मेरे मां-बाप मेरी राह को तकते होंगे, हो चुकी रात मुझे लौटके घर जाने दो... कलाम से वाहवाही बटोरी।
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जफर रहमानी की अध्यक्षता व कारी शुएब के संचालन में हुई शेरी नशिस्त में अकरम जलालाबादी, सरफराज साबरी, डॉ.तय्यब जमाल, शकील वफा, मुख्तार शाद, शेर हुसैन उर्फी, मौलाना अकरम ने भी कलाम पढ़े। शेरी नशिस्त में मुख्य अतिथि रिटायर्ड जज मोहम्मद आदिल ने डॉ.आफताब नोमानी और जफर रहमानी को किशवर एवार्ड से सम्मानित किया। सुल्तान, हाजी जाकिर, मो.शारिक, शाह आलम, महताब नोमानी, मो.साबिर, हाजी ताहिर आदि उपस्थित रहे।
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