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जीएसटी लागू होने के बाद नहीं होगा आईटीसी का गोरखधंधा

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अब नहीं कर पाएंगे आईटीसी की छूट में धांधली
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बिजनौर। जीएसटी लागू होने के बाद आईटीसी (इनपुट टैैक्स क्रेडिट) की छूट का गोरखधंधा बंद हो जाएगा। कोई भी व्यापारी बिना इनवॉइस, ई-वे बिल और बिल्टी के अपना माल दूसरों को नहीं बेच पाएगा। ट्रांसपोर्टरों को भी अपनी फर्म रजिस्टर्ड करानी होगी।
एक जुलाई की आधी रात से जीएसटी लागू होने के बाद पूरे देश में एक कर व्यवस्था लागू हो चुकी है। पहले व्यापारी आईटीसी के नाम पर गोरखधंधा होता है। आईटीसी में व्यापारियों को उत्तर प्रदेश में ही माल खरीदने व बेचने पर टैक्स में छूट मिलती है। इस छूट का फायदा उठाने के लिए कई कंपनी और फर्म केवल कागजों में ही चलती है। ऐसे करके हर साल लाखों रुपये का टैक्स व्यापारी हड़प लेते हैं। बिजनौर में भी ऐसे कई केस देखने को मिल चुके हैं।
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ये है आईटीसी : यूपी से ही माल खरीदने पर व्यापारी वाणिज्य कर विभाग को टैक्स देता है। इस माल पर व्यापारी जो टैक्स जमा करता है। किसी और व्यापारी को यह माल बेचने पर भी व्यापारी को टैक्स देना होता है। माल खरीदते समय जितना टैक्स दिया गया है, बेचते समय उतने टैक्स की छूट मिल जाती है। जितने लाभ में माल बेचा गया है, उतने पर ही टैक्स दिया जाता है।
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ऐसे होता है गोलमाल : व्यापारी किसी ऐसी फर्म से माल की खरीद दिखाते हैं और उस पर टैक्स देते हैं। इस माल को किसी और को बेचने पर जमा किए गए टैक्स के बराबर छूट मिलती है। इस माल को वे किसी फर्म या व्यापारी को बिना कागजी कार्रवाई के मोटे मुनाफे पर बेच देते हैं। कागजों में माल किसी फर्म को कम रेट पर बिका दिखाया जाता है। ऐसे में माल बेचने और खरीदने वाला व्यापारी, दोनों ही टैक्स की चोरी करते हैं। वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर मानव कुमार के अनुसार अब माल बेचने के लिए व्यापारी या फर्म को इनवॉइस नंबर, ई-वे बिल, बिल्टी आदि का उल्लेख करना होगा। पहले ये अनिवार्यता नहीं थी, अब किसी तरह का टैक्स चोरी नहीं होगा।
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