रफ्तार नहीं पकड़ पा रही आयुष्मान भारत योजना, जिला फिसड्डी
बिजनौर। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्ड में बनाने में जिला फिसड्डी है। अफसरों की सुस्ती और जागरूकता के अभाव के चलते पात्रों को कार्ड बनवाने की प्रक्रिया का पता नहीं चल पा रहा है। इस कारण अब तक जिले में कुल 1442 कार्ड ही बन पाए हैं और केवल 125 मरीजों ने ही इस योजना के तहत अपना उपचार कराया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों के उपचार के लिए आयुष्मान भारत योजना को 23 सितंबर 2018 को लांच किया था। इस योजना के तहत जिले भर के करीब दो लाख परिवारों के छह लाख लोगों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज दिया जाएगा। इस कार्ड बनवाने के लिए शासन द्वारा निर्धारित 30 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। यह कार्ड कोई मामूली कार्ड नहीं है। इस स्कीम में शामिल हर व्यक्ति को गोल्डन कार्ड बनवाना अनिवार्य है। कार्ड बनने के बाद ही इलाज हो पाएगा। योजना के अंतर्गत कार्डधारक मुखिया समेत परिवार के पांच सदस्यों का पांच लाख तक चयनित 22 अस्पतालों में नि:शुल्क उपचार कराया जा सकता है। इनमें जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सीएचसी धामपुर और अफजलगढ़ तथा 18 प्राइवेट हॉस्पिटल शामिल हैं। योजना के कार्ड जिला अस्पताल में बनाए जा रहे हैं। कार्ड बनाने की गति इतनी धीमी है कि अभी तक कुल 1442 कार्ड ही बन पाए हैं। अब तक मात्र 125 लोगों ने योजना का लाभ लिया है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एसके. निगम ने बताया कि जागरूकता के अभाव में लोग इसे समझ नहीं पा रहे हैं। लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
कहां बनेंगे गोल्डन कार्ड
गोल्डन कार्ड दो जगहों पर बनेंगे। अस्पताल में और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर। सीएससी गांवों में भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। सीएससी पर कार्ड बनाने के बदले शासन द्वारा निर्धारित 30 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। इस योजना में शामिल व्यक्ति सीएससी पर आकर आयुष्मान भारत की सूची में अपना नाम चेक कर सकता है। नाम न होने पर कार्ड नहीं बनाया जाएगा।