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आकाशवाणी की ओर से हुआ एक शाम दुष्यंत के नाम

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आकाशवाणी नजीबाबाद द्वारा बिजनौर में कार्यक्रम का आयोजन
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बिजनौर। हो चुकी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। यह शेर हिंदी गजल को पहचान दिलाकर जिले का नाम रोशन करने वाले महान शायर एवं कवि दुष्यंत कुमार की हैं। उनकी याद में जनपद में पहली बार आकाशवाणी नजीबाबाद की ओर से एक शाम दुष्यंत के नाम से आयोजित की गई। दुष्यंत को भावपूर्वक स्मरण किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने समां बांध दिया।
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रविवार को कान्हा फार्म में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ आकाशवाणी के अपर महानिदेशक डा. शैलेंद्र कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर किया। उन्होंने कहा कि ये जिलेवासियों के लिए बड़े ही गर्व की बात है कि दुष्यंत जैसे महाकवि का बिजनौर की धरती पर पैदा हुए हैं। आकाशवाणी नजीबाबाद उनके साहित्य एवं सराहनीय कार्यों को देखते हुए संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचा रहा है। वाराणसी से आई रश्मि चौधरी, खंडवा के संतोष अग्निहोत्री, भोपाल से मोहम्मद सलीम आल्लाह वाले, स्टाफ कलाकार सनव्वर अली ने संगीतमयी प्रस्तुति देकर समा बांध दिया। वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र अश्क ने कहा कि दुष्यंत कुमार की गजलें ज्वाला से भरी थीं। बिना किसी लाग लपेट के उनकी रचनाओं में शोषण, भ्रष्टाचार और गरीबी के प्रति आक्रोश मिलता है। दुष्यंत वह कवि हैं जो सामाजिक परिवर्तन चाहते थे और उन्होंने अपने विचारों को लेखनी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। इस मौके पर चंद्रमणि रघुवंशी ने कहा कि कवि दुष्यंत जिले की शान थे। सूर्यमणि रघुवंशी ने कहा कि दुष्यंत त्यागी ने जिले को देश-विदेश में चमकाया है। इसे जिलेवासी कभी नहीं भुला पाएंगे। कार्यक्रम में आकाशवाणी नजीबाबाद की कार्यक्रम प्रमुख मंदीप कौर चड्ढा, कार्यक्रम अधिशासी प्रवीण कुमार, प्रसारण निष्पादक धर्मेंद्र राठौर व विक्रांत चौधरी, सतीश कुमार, बलराम सिंह, बिजेंद्र सिंह, योगेंद्र कुमार वर्मा, मो. गुलाम, फरीद आदि मौजूद रहे।
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