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पारंपरिक कार्यों को और निखारा

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बिजनौर। सांसद द्वारा पुश्तैनी काम को और अधिक बढ़ावा देने और उन्हें ज्यादा से ज्यादा आमदनी बढ़ाने का प्रयास रंग ला रही है। गांव दयालवाला के मूढ़ा उद्योग को सांसद भारतेंद्र के प्रयास से नई चमक मिली है। अब गांव गंजालपुर के मिट्टी के बर्तन बनाने आदि के काम को निखारा जा रहा है। दिल्ली से आई टीम इन गांववालों को प्रशिक्षण दे रही है।
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गांव दयालवाला में पहले मूढ़ा बनाने का काम बड़े स्तर पर होता था, लेकिन कुछ साल पहले गांव के युवा अपने पुश्तैनी काम को छोड़कर दूसरे काम करने लगे थे। वजह थी मूढ़ा उद्योग में लागत के बराबर आमदनी न होना। सांसद भारतेंद्र सिंह ने यहां के युवाओं की बात समझी और उन्हें दिल्ली के सामाजिक सेवा संगठन महावीर इंटरनेशनल के विशेषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दिलाई गई। दिल्ली से आए लोगों ने गांव के कारीगरों को मूढ़े में नए डिजाइन बनाना, उन्हें आकर्षक बनाने के तरीके बताए। दिल्ली में आयोजित एक प्रदर्शनी में गांव दयालवाला के गांव वालों के मूढ़े भी ले जाए गए। वहां पर नए तरीके से बने इन मूढ़ों की खूब बिक्री हुई। इसी तरह गांव गंजालपुर के हुनर को भी चमकाया जा रहा है। गांव गंजालपुर में मुख्य रूप प्रजापति समाज के लोग रहते हैं। ये मिट्टी से दीपक, बर्तन आदि बनाने में माहिर होते हैं, लेकिन बीते काफी समय से मिट्टी के बर्तनों की मांग ज्यादा नहीं थी। इसकी एक वजह यह भी थी कि गांव वाले आज भी पारंपरिक बर्तन ही बनाते थे। कुछ नया प्रयोग करने की कोशिश नहीं की। सांसद ने इन गांव वालों को भी दिल्ली की टीम से प्रशिक्षण दिलाया है। दिल्ली से आई टीम ने गांववालों को नए-नए तरीके के डिजाइन बनाने सिखाए व उन्हें रंगना सिखाया। एक मशीन भी गांव में लगाई गई। इसकी एक प्रदर्शनी आयोजित की गई तो क्षेत्रवासी इन नए तरीके से बने बर्तनों व दीपक को देखकर दंग रह गए। पहले डिजाइन वाला एक दीपक दो रुपये का बिकता था, अब इसकी कीमत पांच रुपये की गई है। इसके अलावा सुराही, फूलदान, गिलास, कप आदि बनाए जा रहे हैं। बर्तनों को ऐसे रंग में रंगा जा रहा है कि वे स्टील के लग रहे हैं। अब फर्म आदि के जरिये इस सब सामान को देश के कोने-कोने में ले जाया जाएगा।

आमदनी बढ़ाने का किया जा रहा पूरा प्रयास
सांसद भारतेंद्र सिंह का कहना है कि वे क्षेत्रवासियों की आमदनी बढ़ाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। इससे पारंपरिक कामों में ही गांव वालों को रोजगार मिल रहा है। गंजालपुर के परिवारों को मिट्टी के लिए सरकारी पट्टे दिलाने की भी कोशिश की जा रही है।
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