निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की हड़ताल
बिजनौर। बैंकों के विलय, निजीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंक की शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंकों की हड़ताल से जिले भर में करीब 200 करोड़ का लेन देन प्रभावित हुआ है। बैंक कर्मचारियों ने मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
मंगलवार को एसबीआई, पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक की शाखाओं में ताले लटके रहे। उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक इंप्लाइज यूनियन के तत्वावधान में सर्व यूपी ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों ने क्षेत्रीय कार्यालय पर प्रदर्शन किया। क्षेत्रीय प्रबंधक को दिए ज्ञापन में बैंकों का निजीकरण, विलय रोकने, ग्रामीण बैंकों में पेंशन सुविधा शुरू करने, सफाई कर्मचारियों का नियमितीकरण करने, जीएसटी के नाम पर प्रक्रिया शुल्क न बढ़ाने की मांग की गई। यूनियन उपाध्यक्ष स्वतंत्रवीर सिंह, राजीव शर्मा, तनवीर अहमद, रावेंद्र पटेल, विनीत कुमार, रवि कुमार, लोकेेंद्र कुमार, दीपक चौधरी, संजय शर्मा, प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन ने एसबीआई की मुख्य शाखा के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की निंदा की। कर्मचारियों ने बैंकों के विलय, वेतन समझौते, सरकारी अंशदान कम करने, लेबर एक्ट आदि में परिवर्तन पर रोष प्रकट किया गया। कर्मचारियों ने सरकारी दमन के खिलाफ एक साथ खड़े होने व किसी भी संगठनात्मक कार्रवाई के लिए तैयार रहने का निर्णय लिया। इस दौरान रामजतन सिंह, अशोक कुमार, निशिकांत शर्मा, आलोक आर्य, संदीप, अजेंद्र कुमार, सुमिरन पाल, गौरव कुमार, संजय गुप्ता, दीपक, सुनील कुमार आदि मौजूेद रहे।
नगीना में सरकारी बैंकों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी व सार्वजनिक क्षेत्र के कई बैंकों को मिला कर बड़ा बैंक बनाने की सरकार की मंशा के खिलाफ नगर के सभी सरकारी बैंक मंगलवार को बंद रहे। सरकारी बैंकों के बंद होने के कारण दूर दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से चल कर यहां पहुंचने वाले बैंकों के खातेदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। खातेदार निराश होकर लौट गए।