ट्रेनिंग ले रहे 14 गाइड, कराएंगे अमानगढ़ की राइड
बिजनौर। अमानगढ़ में जंगल सफारी का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। वन विभाग की ओर से भेजे गए 14 गाइड का प्रशिक्षण अब पूरा होने वाला है। वन विभाग अब वन रेंज में घूमने के लिए शुल्क तय करने में जुटा हुआ है। अभी केवल ऑफ लाइन बुकिंग का विकल्प रखा गया है। गाइड के आते ही बुकिंग शुरू कर दी जाएगी और अमानगढ़ आम पर्यटकों के लिए भी खुल जाएगा। वन्य जीवों की अमूल्य संपदा को संजोय इस जंगल में आम लोग भी वन्य जीवों के दीदार कर पाएंगे।
बिजनौर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को समेटे हुए अमानगढ़ वन रेंज अब पर्यटकों के लिए खुलने जा रही है। मिनी जिम कार्बेट नेशनल पार्क कही जाने वाली रेंज में जिले ही नहीं, बाहर से भी लोग आकर अब वन्य जीवों के दीदार कर पाएंगे। ऐसे वन्य जीव जिन्हें देखने के लिए लोग हजारों रुपये खर्च कर कार्बेट पार्क जाते हैं, अब अमानगढ़ में ही वह देखे जा सकेंगे। वन विभाग की गणना रिपोर्ट पर नजर डालें तो अमानगढ़ में 27 बाघ और 93 काकड़, 80 गुलदार, 11 भालू और 102 हाथी हैं। जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर यह वन रेंज जिम कार्बेट पार्क से सटी हुई है। इस वन रेंज का क्षेत्रफल 9500 हेक्टेयर है। पर्यटन जोन के रूप में इसे शासन स्तर से मंजूरी मिल चुकी है। अब पर्यटकों के लिए इसे खोलने की तैयारी अंतिम चरण में चल रही है। वन विभाग ने पहले चरण में 14 गाइड तैयार किए हैं, जो इस समय प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनके आने पर पर्यटकों के लिए अमानगढ़ वन रेंज को खोल दिया जाएगा।
डीएफओ ऑफिस से बुकिंग और केहरीपुर से मिलेगा प्रवेश
अमानगढ़ वन रेंज में घूमने वालों को अभी ऑफ लाइन बुकिंग ही करानी होगी। यह बुकिंग भी अगले सप्ताह से शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। अभी डीएफओ ऑफिस से बुकिंग होगी और केहरीपुर से अमानगढ़ वन रेंज में एंट्री मिलेगी। अमानगढ़ में अभी पर्यटकों के लिए केवल दिन में घूमने का ही विकल्प रहेगा। वहां रुकने के लिए अभी इंतजार करना होगा। अमानगढ़ वन रेंज में अभी मात्र एक ही गेस्ट हाउस है, उसमें दो ही कमरे हैं। अभी केवल एडवांस बुकिंग वाले पर्यटक ही गेस्ट हाउस में रुक सकेंगे, बाकि को शाम ढलते ही अमानगढ़ से बाहर आना होगा। हालांकि वन विभाग आसपास के गांवों में इको टूरिज्म को बढ़ावा दे रहा है। ताकि आसपास के गांवों में लोग पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था करें।
शुल्क नहीं हुआ तय, चल रहा मंथन : डीएफओ
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि वन विभाग ने अभी अमानगढ़ में घूमने के लिए शुल्क तय नहीं किया है। वन अफसरों की माने तो शासन से निर्देश मिलने का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि यदि शासन से गाइडलाइन आने से पहले पर्यटन शुरू होता है तो दुधवा पार्क की तर्ज पर पर्यटकों से शुल्क वसूला जाएगा। हमारे 14 गाइड जल्द प्रशिक्षण पूरा कर लौटने वाले हैं। अभी केवल ऑफ लाइन बुकिंग होगी। जल्द ही अमानगढ़ के लिए बुकिंग और पर्यटन शुरू होने की तिथि की घोषणा हो सकती है।
अमानगढ़ में इन वन्यजीवों का कर सकेंगे दीदार
अमानगढ़ वन रेंज में यूं तो घूमने के लिए बेहतरीन जंगल है, लेकिन यहां पर पक्षियों की बात करें तो दर्जनों प्रजाति के पक्षियों के साथ-साथ गिद्ध भी देखने को मिलते हैं। वन्य जीवों में यहां पर बाघ 27, काकड़ 93, गुलदार 80, भालू 11, हाथी 102, सुअर 1837, फिशरकैट 22, मगरमच्छ 54, काले हिरन 208, लकड़बग्घा दो, हिरन, पहाड़ा 541, लोमड़ी 253, वनरोज 3185, सियार 1434, सांभर 247, मोर 1548, चीतल 2350, बिज्ज 59, बारह सिंघा 35, सेह 84, गोह 71, जंगली बिल्ली 96 हैं। कार्बेट पार्क और अमानगढ़ के बीच केवल एक सड़क है। यहां पर वन्य जीवों की संख्या घटती और बढ़ती रहती है।