गन्ने के मोह ने घटा दिया धान का रकबा
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर। जिले में इस साल धान का रकबा 20 हजार हेक्टेअर कम होने का अनुमान है। गन्ने का रकबा बढ़ने और मानसून की बेरुखी से किसानों ने इस साल धान की फसल से मुंह मोड़ लिया है। जिन किसानों ने धान की फसल बोई है, उन्हें सिंचाई में ज्यादा रुपया खर्च करना पड़ रहा है। इससे धान का उत्पादन घटने की भी संभावना जताई जा रही है।
जिले के किसान काफी संख्या में धान बोते हैं। बिजनौर में बोया जाने वाला बासमती धान विदेशों में भी भेजा जाता है। पिछले साल जिले में करीब 50 हजार हेक्टेअर जमीन में धान बोया गया था। पिछले साल धान की अच्छी पैदावार हुई थी। इस साल धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इससे धान का रकबा बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन इसके करीब 20 प्रतिशत तक घटने का अनुमान है। इसकी वजह गन्ने की ओर किसानों का झुकाव और मानसून की बेरुखी। इस साल जिले में बहुत कम बारिश हो रही है। बारिश न होने से किसानों को सिंचाई में ज्यादा खर्चा करना पड़ रहा है।
जिले में धान 15 जून से 15 जुलाई तक बोया जाता है। धान की फसल में हर समय नमी रहनी चाहिए। अगर बारिश नहीं होती तो किसानों को बार बार फसल को पानी देना पड़ता है। अगर किसान को डीजल इंजन से पानी देना हो तो एक बीघा जमीन भरने में डेढ़ लीटर डीजल तक लगता है। यानि हर सिंचाई पर 100 रुपये प्रति बीघा का खर्च आता है।
साल बारिश
2009 584.20
2010 1369.11
2011 821.92
2012 572.30
2013 1125.26
2014 897.25
2015 935.50
2016 962.76
2017 984
2018 167.9 अब तक
जिले में माहवार बारिश का औसत
महीना बारिश इस साल
जनवरी 34.30 7.20
फरवरी 35.50 00
मार्च 17.70 00
अप्रैल 10.50 11.80
मई 17.10 5.20
जून 107.30 70.70
जुलाई 337.50 73(16 जुलाई तक)
अगस्त 310.90
सितंबर 191.80
अक्तूबर 29.80
नवंबर 4.20
दिसंबर 11.70
योग 1108.30 167.9
नोट : बारिश के गत वर्ष के आंकड़े मिली मीटर में हैं और कृषि विभाग से लिए गए हैं।
साल रकबा उत्पादन
2011-12 53734 23.97
2012-13 51390 25.24
2013-14 52943 23.29
2014-15 54742 26.16
2015-16 51317 25.90
2016-17 53369 25.29
2017-18 50835 25.11
नोट : उक्त आंकड़े प्रति हेक्टेअर धान उत्पादन के हैं और क्रॉप कटिंग के हैं। ये आंकड़े कृषि विभाग से लिए गए हैं।
-----------कोट
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्रा के अनुसार धान के रकबे में कमी आने की संभावना है। हालांकि अभी भी किसान धान बो रहे हैं। बारिश न होने से किसानों के सामने परेशानी आ रही है।