सुलझ नहीं रहा रामपुर ठकरा का विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
गांव रामपुर ठकरा में वन विभाग की जमीन की पैमाईश में जमीन ओवरलैप मिलने पर वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी आमने-सामने आने लगे हैं। वन विभाग ने जमीन ओवरलैप मिलने को गलत बताया है। वहीं, राजस्व विभाग पैमाईश को सही बताते हुए जमीन ओवरलैप मिलने की बात कह रहा है।
गांव रामपुर ठकरा को वन विभाग की जमीन से हटाने का मामला काफी समय से गरम है। कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग की जमीन पर बसे गांव को खाली कराने की कवायद चल रही है। एसडीएम वीके सिंह ने गांव वालों की मांग पर जमीन का एक बार फिर से सीमांकन कराने का निर्देश दिया था। रामपुर ठकरा गांव बिजनौर और मुजफ्फरनगर दोनों जिलों में हैं। बिजनौर के गांव रामपुर ठकरा वाले भी अपने आप को मुजफ्फरनगर सीमा में बता रहे थे। एसडीएम के निर्देश पर जिला बिजनौर और मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील की राजस्व टीम ने जमीन का सीमांकन किया।
सीमांकन में 51 हेक्टेअर जमीन ओवरलैप मिली। यह जमीन दोनों जिलों के रिकॉर्ड में दर्ज मिली है। इस सर्वे रिपोर्ट के बाद अब वन विभाग, राजस्व विभाग में आपस में ही ठन गई है। वन विभाग राजस्व विभाग के इस सर्वे को गलत मान रहा है। डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन के मुताबिक जमीन को वन विभाग में दर्ज करने के लिए पहले धारा चार के अंतर्गत राजस्व विभाग द्वारा घोषणा की जाती है। सभी विवाद समाप्त करने के बाद धारा 20 के अंतर्गत वन विभाग की जमीन घोषित होती है। इसकी घोषणा भी राज्यपाल द्वारा होती है। 1968 में ही रामपुर ठकरा वाली जमीन को धारा 20 के अंतर्गत लाया जा चुका है। राजस्व विभाग ने गलत सर्वे किया है। उधर, एसडीएम वीके सिंह के मुताबिक विभाग का सर्वे एकदम सही है। मौके पर 51 हेक्टेअर जमीन ओवरलैप मिली है। इसके बारे में अधिकारियों को बता दिया गया है।