बिजनौर। नगीना व नजीबाबाद तहसील क्षेत्र में संचालित 22 स्टोन क्रेशर को बंद करने के डीएम के निर्देश पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ये स्टोन क्रेशर एलीफैंट रिजर्व के दस किमी की परिधि के अंदर होने की डीएफओ की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने इन पर रोक लगाई थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक लखनऊ ने इस पर प्रभागीय वनाधिकारी नजीबाबाद व बिजनौर को कहा है कि एलीफैंट रिजर्व सीमा के बाहर स्टोन क्रेशर संचालन का निर्धारण अपेक्षित नहीं है। डीएफओ ने डीएम को इस संबंध में अपनी रिपोर्ट भेज दी है। इस रिपोर्ट के बाद बंद पड़े स्टोन क्रेशरों के चलने की राह खुल जाएगी।
लंबे समय तक कच्चे माल की वजह से नजीबाबाद व नगीना तहसील क्षेत्र में चल रहे स्टोन क्रेशर बंद पड़े थे। पिछले दिनों जब कुछ स्टोन क्रेशरों को कच्चा माल मिलने लगा तो उन्होंने क्रेशिंग शुरू कर दी। इस पर प्रशासन को शिकायत की गई कि रिजर्व फॉरेस्ट के दस किलोमीटर की परिधि में आने के कारण स्टोन क्रेशर संचालित नहीं किए जा सकते हैं। इस मामले में डीएफओ नजीबाबाद व बिजनौर की रिपोर्ट आने के बाद नजीबाबाद व नगीना तहसील क्षेत्र में स्टोन क्रेशर बंद करने के निर्देश डीएम ने दिए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि रिजर्व क्षेत्र से दस किलोमीटर की दूरी में जल, वायु, मृदा व ध्वनि प्रदूषण करने वाले कारखाने लगाना प्रतिबंधित है। इस मामले में 26 जनवरी को डीएफओ बिजनौर व नजीबाबाद को भेजे अपने शासकीय पत्र में प्रधान मुख्य वन संरक्षक/वन्य जीव उत्तर प्रदेश लखनऊ एसके उपाध्याय ने कहा है कि बिजनौर जिले में वन प्रभाग का 79.996 वर्ग किलो मीटर वन क्षेत्र एवं 344.05 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र जो एलीफैँट रिजर्व घोषित है, वन्य जीव अधिनियम 1972 के अंतर्गत विधिक रूप से अधिसूचित संरक्षित क्षेत्र नहीं है। उक्त हाथी रिजर्व की सीमा के बाहर स्टोन क्रेशर सहित स्टोन क्रेशर की क्रियाओं को नियंत्रित व प्रतिबंधित करने का निर्धारण अपेक्षित नहीं है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक/वन्य जीव का पत्र मिलने के बाद स्टोन क्रेशर बंद किए जाने के बारे में पुन:30 जनवरी को डीएफओ द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि एलीफैँट रिजर्व के बाहर स्टोन क्रेशर को बंद किया जाना अपेक्षित नहीं है।