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पूरे साल चिकित्सकों की कमी से जूझा जिला अस्पताल

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पूरे साल चिकित्सकों की कमी से जूझा जिला अस्पताल
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बिजनौर। साल 2017 में स्वास्थ्य सेवाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। सरकारी मेडिकल कॉलेज के निर्माण की बात आगे नहीं बढ़ी और जिला अस्पताल भी चिकित्सकों से खाली होता चला गया। साल के जाते जाते जिला महिला अस्पताल पर 20 घंटे में ही पांच नवजात बच्चों की मौत की कालिख भी लग गई।
पूरे साल में 600 से अधिक राहगीरों की जिंदगी सड़कों पर हुए हादसों ने लील ली। घायलों व अन्य गंभीर रोगियों के उपचार के लिए सरकारी अस्पताल केवल रेफर सेंटर ही बने रहे। हालत यह है कि जिला महिला अस्पताल में नवजात को बेबी वॉर्मर मशीन में रखने का परामर्श तक देने के लिए भी चिकित्सक नहीं है। महिलाओं के उपचार के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बना 100 बेड का अस्पताल अब तक चालू नहीं हुआ। कागजों में अस्पताल को इस साल शुरू कर दिया गया, लेकिन अभी तक यहां पर किसी चिकित्सक या अन्य स्टाफ की नियुक्ति ही नहीं की गई है। सूबे की सत्ता बदलते ही मेडिकल कॉलेज के निर्माण का प्रस्ताव भी फाइलों में धूल ही फांक रहा है। मेडिकल कॉलेज बिजनौर के गांव स्वाहेड़ी में बनना है। केवल एक साल में मेडिकल कॉलेज की जमीन चिह्नित की गई है।
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जिले के अस्पताल भी चिकित्सक विहीन होते जा रहे हैं। जिला अस्पताल से सर्जन वीके शुक्ला को सीएमओ बरेली, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल को इटावा का सीएमओ बना दिया गया। जिले में चिकित्सकों के 169 पद हैं। लेकिन केवल 55 चिकित्सक ही तैनात हैं। इनमें से भी 10 चिकित्सक त्यागपत्र दे चुके हैं और 18 चिकित्सक बिना सूचना दिए ही अनुपस्थित चल रहे हैं। जिला अस्पताल में हृदय रोगियों के उपचार के लिए एक कार्डियोलोजिस्ट की नियुक्ति इस साल भी नहीं हो सकी। पिछले दस साल से अधिक समय से जिला अस्पताल में कार्डियोलोजिस्ट नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली ऐसी हो गई कि जिला अस्पताल में आंखों के मरीजों के उपचार के लिए लेंस तक नहीं हैं।
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लखनऊ से किया था शिलान्यास
सपा सरकार में बिजनौर में मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा हुई। इसके लिए सुहाहेड़ी के पास जमीन भी ले ली गई। लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शिलान्यास भी किया। भाजपा सरकार आते ही इसकी फाइल कहां चली गई, पता नहीं चला। कई माध्यम से मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग उठी किंतु सब बेकार रही। बिजनौर के सांसद भारतेंद्र सिंह ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने मेडिकल कॉलेज का मामला उठाया भी किंतु कुछ लाभ नहीं हुआ। प्राइवेट सेक्टर में मेडिकल कॉलेज खेलने के लिए काम हुए। विवेक कॉलेज, कृष्णा कॉलेज और भगवंत कॉलेज ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना के प्रथम चरण में अस्पताल खोल लिए हैं। विवेक कॉलेज में बीएएमएस शुरू होगा। भगवंत और कृष्णा की इस दिशा में कार्रवाई चल रही है।
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