दलित लिपिक और एसडीएम विवाद में नहीं हुई जांच शुरू
बिजनौर। चांदपुर एसडीएम कार्यालय में तैनात व आईएएस एसडीएम आलोक यादव के विवाद के मामले में अभी कोई जांच शुरू नहीं हुई है। डाक से भेजी गई शिकायत एसपी को नहीं मिल पाई है। लिपिक किशन चंद आईएएस आलोक यादव से पहले दो एसडीएम पर भी उत्पीड़न का आरोप लगाकर उनकी शिकायत कर चुके हैं।
बिजनौर के मोहल्ला कस्साबान निवासी किशन चंद एसडीएम चांदपुर के कार्यालय में आशु लिपिक हैं। उन्होंने चांदपुर के आईएएस एसडीएम आलोक यादव पर जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने व उत्पीड़न का आरोप लगाकर इसकी शिकायत अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग व एसपी से की थी। एसडीएम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए चांदपुर के कोतवाली प्रभारी दुर्गेश मिश्रा को भी तहरीर दी थी। एसपी को आशु लिपिक ने डाक द्वारा शिकायत की थी। इस मामले में अभी कोई जांच शुरू नहीं हुई है। डाक से भेजी गई शिकायत भी एसपी को नहीं मिली है। आशु लिपिक किशन चंद ने नगीना में तैनाती के दौरान तत्कालीन एसडीएम सुरेंद्र सिंह चाहल पर जाति सूचक शब्दों से अपमानित व उत्पीड़न का आरोप लगाकर इसकी शिकायत की थी। इस मामले में भी अफसरों से जांच कराई थी। किशन चंद का दावा है कि उनकी शिकायत पर ही एसडीएम सस्पेंड हुए थे। धामपुर में तैनाती के दौरान तत्कालीन एसडीएम जितेंद्र प्रताप के साथ भी किशन चंद का विवाद हो गया था। किशन चंद ने उनकी भी शिकायत आला अफसरों से की थी। जितेंद्र प्रसाद पर भी जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाया था। किशन चंद के मुताबिक तत्कालीन कमिश्नर ने इसकी जांच की थी। किशन चंद के मुताबिक उन्होंने बेवजह आईएएस आलोक यादव पर आरोप नहीं लगाए हैं। किसी के खिलाफ भी झूठी शिकायत नहीं की है।
आलोक यादव का कहना है कि उन पर आशु लिपिक के लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कोई जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। न ही आशु लिपिक का उत्पीड़न किया है। एक सप्ताह पहले ही उनकी तैनाती चांदपुर में हुई है। वे तो पूरे स्टाफ को सही से पहचानते भी नहीं हैं।